इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शुक्रवार, 31 अगस्त 2007

धोखा, मजबूरी


नूतन प्रसाद
नूतन प्रसाद
उसकी तीव्र इच्छा थी कि नेता बने लेकिन मतदाताओं को उल्‍लू नहीं बना पाया तो अभिनेता बन गया.सदा से वह डरपोक रहा इसलिए जोखिम भरा कार्य डुप्लीकेट  को थमा देता और सरल कार्य करने का समय  आता तो स्वयं का सीना अड़ा देता.जैसे शेर से मुकाबला करने के वक्‍त  डुप्लीकेट को धकेल देता.जब शेर हो जाता ढ़ेर तो उसकी मूंछें उखाड़ने खुद धमक जाता.दर्शक दाद देते कि अभिनेता तो सवा शेर है.इधर डुप्लीकेट परेशान था कि  मेहनत करती है मुर्गी् मगर  फकीर अंडे खा कर शरीर बना रहा है.आखिर एक दिन सुअवसर उसके हाथ आया.हुआ यह कि अभिनेता के पारिश्रमिक के दस लाख रूपये उसके हाथ पड़ गये.अभिनेता दौड़ा आया.उसके चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थी.उसने कहा - धोखा हो गया.निर्माता ने रूपये मेरे पास भेजे थे लेकिन उनके पी.ए. ने तुम्हें दे दिये.लाओ,वापस करो.डुप्लीकेट ने कहा - धोखा कब नहीं हुआ.फिल्मों मे पहाड़ से छलांग लगाते तुम दिखते हो पर वास्तव में होता हूं मैं.फिल्म क्षेत्र में धोखा का नाम ही तो विश्वास है.
टेढ़ी ऊंगली से घी नही निकली तो अभिनेता ने चालाकी चली.कहा - मूर्ख, यदि डाकू रूपये उड़ा गये या आयकर की चक्‍की में पीस गये तो बेमौत नहीं मरोगे ! मुफत में खतरा मोल क्‍यों लेते हो ! रूपये इधर फेंकों ।''
डुप्लीकेट ने कहा - जनाब, खतरों से अपुन को कोई खतरा नहीं .खतरे उठाने का धंधा ही पुराना है.एक खतरा और सही....।''
इतना कह डुप्लीकेट रूपयों को पचा गया.
मजबूरी
सम्पादक ने पत्रकार से पूछा- कहो,आज का समाचार ?''
पत्रकार ने कहा - सब ठीक ठाक है. कहीं से बुरी खबर नहीं मिली''
- क्‍या, हत्या, डकैती कुछ भी नहीं ?''
- बिल्कुल नहीं । और तो और पाकिटमारी तक नहीं.''
- तो भी लिखो कि जहरीली शराब पीने से दो सौ लोगों की मृत्यु.बम विस्फोट से संसद भवन ध्वस्त ....।''
- लेकिन ये तो झूठे होंगे .''
- होने दो, हमें पाठकों की रूचियो का ध्यान रखना है.यदि विस्फोटक समाचार न दे तो अखबार कोई खरीदेगा ?''    
                        पता- भंडारपुर ( करेला) पोष्‍ट - ढारा 
व्‍हाया - डोंगरगढ़, जिला - राजनांदगांव (छग)   

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