इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शुक्रवार, 29 मार्च 2013

देवारी तंय


  • गोपालदास साहू

    देवारी तंय  आवत होबे, दीया मन ल संग म लावत होबे
    हरेली अइस धान बर हरियर लुगरा लइस
    गहिरा मन बर लीम डारा दसमुर डोंटों कांदा  लाइस
    हस हस के घर कुरिया म लीम दसमुर खोंचिस
    नागर बसुला टंगिया धोइन लइका मन गेड़ी फांदिस
    गेड़ी चढ़ाके लइका मन ल खेलावत होबे
देवारी तंय  ........................।
    थोरके दिन मं अइस पोरा बिचारा मुरहा
    ठेठरी खुरमी भजिया लाइस अंगाकर गुरहा
    तीज के  दिन पारबती अइस पूजा करिन तिजहारिन
    चउत के दिन गनपति अइस नाचिन गाइन बनिहारिन
    नंदिया बइला चढ़के रेंगावत होबे
देवारी तंय .........................।
    कुंवार अइस पुरखा मन ल संग म लइस
    पुरखा बनके कउवा पनदरा दिन बरा भजिया खइस
    नवमी अइस धान बर पियर लुगरा लइस
    दसेरा म रावन मरिस धान के छटठी निपटाइस
    तलवार धर दसेरा तंय  आवत होबे
देवारी तंय ..........................।
    गाय  बर सोहई धर के अइस देवारी
    कोहड़ा कोचइ लइस दीया बारे नरनारी
    गहिरा सोहई बांधिन साजू अउ फूलेता साजिन
    दफड़ा दमउ बजइन झूमर के नाचिन
    आज गोपाल तंय  गोवर्धन खुंदावत होबे
देवारी तंय  .............................।
भंडारपुर (करेला)
पो.- ढ़ारा, व्हाया - डोंगरगढ़, जिला - राजनांदगांव (छ.ग.)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें