इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शनिवार, 30 मार्च 2013

आज के नेता

कविता
बोधन प्रसाद पाटकर
आज के नेता कुर्सी के बनगे दास
ये मन गरीबी ला मिटाही झन करहू आस
    भाषण आश्वासन देके जनता ल फुसलाये
    भूखा मा प्राण छूटत हे बिस्कुट देके बहलाये
गांव गांव मा पार्टी बंदी फूट समागे
जनता ल बरगलाय  बर नेता मौका पागे
    घरों - घर मा नेता बिलबिलागे
    आये दिन लड़ाई अदालत मा पैसा फूंकागे
जुन्‍ना सियान मन के नियाव नंदागे
पंच  - परमेश्वर के कहावत मेटागे
    पहली के गांव के , नक्‍सा चेहरा बदलगे
    आपस के प्रेम भाव सुख शांति उजड़गे
                            द्वारा - आनंद तिवारी पौराणिक
श्री राम टाकीज मार्ग
महासमुंद (छग.)

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