इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 30 मार्च 2013

आज के नेता

कविता
बोधन प्रसाद पाटकर
आज के नेता कुर्सी के बनगे दास
ये मन गरीबी ला मिटाही झन करहू आस
    भाषण आश्वासन देके जनता ल फुसलाये
    भूखा मा प्राण छूटत हे बिस्कुट देके बहलाये
गांव गांव मा पार्टी बंदी फूट समागे
जनता ल बरगलाय  बर नेता मौका पागे
    घरों - घर मा नेता बिलबिलागे
    आये दिन लड़ाई अदालत मा पैसा फूंकागे
जुन्‍ना सियान मन के नियाव नंदागे
पंच  - परमेश्वर के कहावत मेटागे
    पहली के गांव के , नक्‍सा चेहरा बदलगे
    आपस के प्रेम भाव सुख शांति उजड़गे
                            द्वारा - आनंद तिवारी पौराणिक
श्री राम टाकीज मार्ग
महासमुंद (छग.)

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