इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

रविवार, 24 मार्च 2013

सस्‍ता , स्थापना

                                                                     
                                


                           - उमेश कुमार चौरसिया -आज बाजार में बड़ा हल्ला हो रहा था। सुना है मंहगाई में कुछ कमी हुई है। बड़े मैदान पर चल रही सभा में नेताजी जोर - जोर से बता रहे थे.ये हमने कर दिखाया है.....रसोई गैस में 20 और पेट्रोल - डीजल में 5.5 रूपये की कमी की है........हवाई जहाज का किराया भी हमने 30 प्रतिशत कम कर दिया है............जमीनों की कीमतें और सीमेंट - सरिये की कीमतें भी कम हो रही हैं........हमने जनता की सुविधा का पूरा ध्यान रखा है......इससे गरीब जनता को राहत मिलेगी.....। किसना दिन भर ठेले पर माल ढोता यह सब सुनकर बहुत खुश था। वह सोच रहा था - आज मेरी मजूरी में से चार - पांच रूपये तो बच ही जाएंगे।
शाम को वह जल्दी - जल्दी राशन की दुकान पहुंचा। वहां भी कुछ लोग मंहगाई में राहत होने की ही चर्चा कर रहे थे। किसना खुश होता हुआ बोला - सेठजी,मुझे तो आटा - दाल ही चाहिए.........इसमें कितने कम हुए......। उसकी बात सुन सेठजी सहित वहां खड़े सभी लोग ठहाका लगाकर हंस पड़े।                                                                            50, महादेव कॉलोनी, नागफणी बोराज रोड, अजमेर 30500 राजस्थान
स्थापना
                                 - अखिलेश शुक्ल -
वे नगर सेठ हैं। कई मिलों के मालिक, कारखाने चल रहे हैं, आढत है। उनका नगर में रूतबा है। स्थानीय संस्थाओं, पुलिस तथा प्रशासन में तूती बोलती है। किसी की भी क्या मजाल कि चूं चपड़ कर सके।
उस रविवार स्थानीय समाचार पत्र में नगरपालिका का टेण्डर छपा था। उनके घर के सामने से बहने वाले अधूरे नाले के निर्माण कार्य पूर्ण करने की छोटी सी निविदा थी वह।
वह निविदा स्वीकृत हुई। निर्माण कार्य की तैयारी भी प्रारंभ हुई। लेकिन नाले का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
वजह! सेठ जी ने नाले के किनारे, अपने विशाल भवन की चहारदीवारी के पास हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना जो कर रखी थी।
                                                                                    संपादक कथा चक्र,63, तिरूपति नगर, इटारसी 461111 (म.प्र.) 
           मो. 09229532367

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