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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शुक्रवार, 29 मार्च 2013

बोधन प्रसाद के दो गीत


बनिहार
  • बोधन प्रसाद पाटकर
दिन भर जांगर टोर कमाथे,
खाये बर पेज पसीया पाथे
    काम नई मिलय  वो दिन करम ठठाथे
    नोनी बाबू मन रोवत सुत जाथे
होली दसेरा देवारी तिहार आथे
नवा कपड़ा बर लइका मन तरस जाथे
    आज अइका मन मिठाई बताशा खाथे
    बनिहार लइका ल चांउर रोटी मं भुलियारथे
हालत देख लइका के जीव तरफ जाथे
आंसू पीयत, छाती पीटत तिहार चले जाथे
    बनिहार के बेटी बेटा जवानी मं बूढ़ा जाथे
    जीवन में दू घड़ी सुख बर तरस जाथे ।
2
खेत खार
धान के सोनहा बाली मस्ती म झुमरत हे
लइका पटकाउ मन मन गढ़कत हे
गंहू चांदी कस कर्रा मेछा ल अइठत हे
चना बिचारा लुटरा मुड़ उठाके देखात हे ।
पिंयर लुगरा पहिने सरसों गावत हे
सुवा ददरिया भौरा गीत सुनावत हे
कुसुम कुंवारी मटक मटक के नाचत हे
बुढ़वा राहेर मांदर मं थाप लगावत हे
खार खार मं महुआ तेंदू, आमा खड़े अटियावत हे
मुसुर मुसुर महुवा मुसकाथे, आमा के मोर महकत हे
चार मकाइया लइका मन के मन ला ललचावत हे
किंजर किंजर के भरे मंझनिया मन भर के खावत हे
                पता . व्‍दारा -, आनंद तिवारी पौराणिक
                श्रीराम टाकीज मार्ग
                    महासमुंद

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