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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

सोमवार, 25 मार्च 2013

निगाहें कातिल

नलिन श्रीवास्तव
निगाहें कातिल में हिजाब नहीं
हैं कत्ल कितने किये, हिसाब नहीं -
    मेरी बस्ती में है सवाल ही सवाल,
    एक चेहरा भी बा - जवाब नहीं -
आसमां लगता है, बियाबां - सा,
कोई आफतबो महताब नहीं -
    जिसके किस्से में तू नहीं मैं नहीं,
    क्‍या ऐसी कोई किताब नहीं -
जब्‍त है कहकहों की तम,
मुस्कराता सा भी कोई ख्वाब नहीं -
    है जहन जलता हुआ आफताब सा,
    पर सुबह की रौशनी का ताब नहीं -
हर कदम पर दम है बस उखड़ता सा,
सोचता हूं फिर भी इन्कलाब नहीं -

पता - वार्ड नं. - 32, ब्राम्हाणपारा, राजनांदगांव(छग)

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