इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

सोमवार, 25 मार्च 2013

निगाहें कातिल

नलिन श्रीवास्तव
निगाहें कातिल में हिजाब नहीं
हैं कत्ल कितने किये, हिसाब नहीं -
    मेरी बस्ती में है सवाल ही सवाल,
    एक चेहरा भी बा - जवाब नहीं -
आसमां लगता है, बियाबां - सा,
कोई आफतबो महताब नहीं -
    जिसके किस्से में तू नहीं मैं नहीं,
    क्‍या ऐसी कोई किताब नहीं -
जब्‍त है कहकहों की तम,
मुस्कराता सा भी कोई ख्वाब नहीं -
    है जहन जलता हुआ आफताब सा,
    पर सुबह की रौशनी का ताब नहीं -
हर कदम पर दम है बस उखड़ता सा,
सोचता हूं फिर भी इन्कलाब नहीं -

पता - वार्ड नं. - 32, ब्राम्हाणपारा, राजनांदगांव(छग)

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