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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

रविवार, 24 मार्च 2013

मेरे करीब वो

                    - मो. कासिम खॉन '' तालिब ''
मेरे करीब वो है मैं उसके करीब हूं
अल्लाह की करम है बड़ा खुशनसीब हूं
रुठे हुए हैं एक ज़रा सी ही बात पर
वो जानते नहीं कि मैं उनका नसीब हूं
पाते हैं हर मरीज़ हर एक मज़र् से शिफा
देता हूं बस दुआएं मैं ऐसा तबीब हूं
मेरा वो आईना है मैं उसका हूं आईना
मेरा रकीब वो है मैं उसका रकीब हूं
पासे - अदब है और है परदा भी दरमियाँ
तालिब वो जानते हैं मैं कितना करीब हूं
पता 14, अमीर कम्पाउण्ड, बीएनपी रोड,
 देवास म.प्र. मोबाईल : 9754038864








    - जितेन्द्र  सुकुमार  -
खामोश हर मन्जर है साहब
सरसब्ज़ जमीं बन्जर है साहब
जल रही है शबनम की बूंदे
प्यासा यहाँ समन्दर है साहब
जो उछल रहा है हर तरफ
वो इंसाँ नहीं बन्दर है साहब
संभल कर रहना इस इलाकों में
ये खूनी खन्जर है साहब
जो उजाड़ कर रख दे अशियाना
वो हवा नहीं बवण्डर है साहब
साहित्यकार, उदय आशियाना,
    पता चौबेबांधा राजिम
जिला - गरियाबंद छ.ग. - 493885

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