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मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

तुझे नहीं है घबराना

कविता

  • संगीता कमलेश
तुझे नहीं है घबराना।
है आगे ही बढ़ते जाना॥

चाहे पत्थर आये या चटटान ।
उसे हिम्मत से ढहाना॥
तुझे मंजिल तक है जाना।
सत्य के दीप को है जलाना॥
तुझे नहीं है घबराना।
है आगे ही बढ़ते जाना॥

कुरीतियों का करना खातमा।
देश को सम्हाल कर है रखना॥
तब होगा महापुरूषों की वंदन।
हम सब है उनकी संतान॥
संतान होने का है फर्ज निभाना।
तुझे नहीं है घबराना॥
है आगे ही बढ़ते जाना॥

इस मिट्टी से काया है निर्मल।
मिलकर भारत मां का चरन वंदन॥
है इनका कर्ज चुकाना।
तुझे नहीं है घबराना।
है आगे ही बढ़ते जाना॥
                                द्वारा सी.आर. कमलेश
पो.आ. ग्राम - मालखरौदा
जिला - जांजगीर - चांपा (छ.ग.)

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