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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

शिवनाथ के धारा




  • कृष्ण कुमार पाटिल
हमर मया के बानी बनगे, का बस्ती का पारा।
चंदा सुरूज कस अमर रिहि ये शिवनाथ के धारा ॥
        ०००
चिटिक अंजोरी, रात चंदैनी, मैं बनहुं अमरइया ,
बदन पीताम्बर हाथ में बंसी, तय बनबे पुरवइया
॥ दूनो मिलके रास रचाबो, उहि कदम के डारा ॥ हमर ...
        ०००
मनखे ल का दपन करें हंसा का मर जाही,
लकड़ी बरही, तन हा जरही, हंसा तो उड़ जाही
॥ सांच मया बर इंहा के जइसन, नइये पहरे दार॥ हमर ....
        ०००
हमर कोरा मं बड़ उपजत हे, सोनहा धान के बाली,
जब तक ये शिवनाथ बोहाही, करबो तुंहर रखवारी
॥ धार मया के छलकत रीही, झन करहव बंटवारा ॥ हमर ...

2 सुनता के गीत गाही
खोचका डबरा डबडबाही, डबरा, तरिया लबलबाही,
सुनता के गीत गाही, मंजा आही ऐसो के असाढ़ मा ॥
               ०००
करिया करिया बादर छाही, लइका मन इतराही,
लइका संग मा धांवरा बछरू, कान टेढ़ मेछराही
झिमिर - झिमिर पानी आही, ओइरछा हा गीत गाही ॥ मंजा...
                ०००
गोड़ा ले निकलही खेत जोंता के,खुमरी अउ तुतारी,
खुसरा चिरई,आल्हा गाही,डोकरी दीही गारी,
देखा के ढेरा पाटी,रनधनी में बपरही बांटी ॥ मंजा ...
               ०००
गांव के जम्मों भाठा भुइयां मीट़ठू कस हरियाही
मेचका बजाही दपड़ा बाजा, पड़की गाना गाही
ढोड़िया मन सलमलाही,कोकड़ा मन मांदी खाही ॥ मंजा ...
ग्राम - चीचा पाटन जिला - दुर्ग ( छ.ग.)

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