इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

शिवनाथ के धारा




  • कृष्ण कुमार पाटिल
हमर मया के बानी बनगे, का बस्ती का पारा।
चंदा सुरूज कस अमर रिहि ये शिवनाथ के धारा ॥
        ०००
चिटिक अंजोरी, रात चंदैनी, मैं बनहुं अमरइया ,
बदन पीताम्बर हाथ में बंसी, तय बनबे पुरवइया
॥ दूनो मिलके रास रचाबो, उहि कदम के डारा ॥ हमर ...
        ०००
मनखे ल का दपन करें हंसा का मर जाही,
लकड़ी बरही, तन हा जरही, हंसा तो उड़ जाही
॥ सांच मया बर इंहा के जइसन, नइये पहरे दार॥ हमर ....
        ०००
हमर कोरा मं बड़ उपजत हे, सोनहा धान के बाली,
जब तक ये शिवनाथ बोहाही, करबो तुंहर रखवारी
॥ धार मया के छलकत रीही, झन करहव बंटवारा ॥ हमर ...

2 सुनता के गीत गाही
खोचका डबरा डबडबाही, डबरा, तरिया लबलबाही,
सुनता के गीत गाही, मंजा आही ऐसो के असाढ़ मा ॥
               ०००
करिया करिया बादर छाही, लइका मन इतराही,
लइका संग मा धांवरा बछरू, कान टेढ़ मेछराही
झिमिर - झिमिर पानी आही, ओइरछा हा गीत गाही ॥ मंजा...
                ०००
गोड़ा ले निकलही खेत जोंता के,खुमरी अउ तुतारी,
खुसरा चिरई,आल्हा गाही,डोकरी दीही गारी,
देखा के ढेरा पाटी,रनधनी में बपरही बांटी ॥ मंजा ...
               ०००
गांव के जम्मों भाठा भुइयां मीट़ठू कस हरियाही
मेचका बजाही दपड़ा बाजा, पड़की गाना गाही
ढोड़िया मन सलमलाही,कोकड़ा मन मांदी खाही ॥ मंजा ...
ग्राम - चीचा पाटन जिला - दुर्ग ( छ.ग.)

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