इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

मिलावट राम

 विता
  • रामसाय धारिया
मेरा नाम मिलावट राम
करता हूं मिलावट का काम
पाप काटने के लिए जाता हूं चारोधाम।
मेरा नाम मिलावट राम॥


वहां बैठे रहते हैं पंडा पुजारी
करता हूं उनको दान।
खुश होकर वे कहते हैं-
जुग - जुग जियो मिलावट राम।
मरोगे तो जाओगे बैकुण्ठधाम॥
मेरा नाम मिलावट राम॥


उड़द मूंग मसूर चना में
मिलाता हूं काली मिट्टी
दाँतों को लगे तेज गिट्टी
चाँवल के कंकण - पत्थर
हाल मत पूछो गेंहूं का
जिसमें मिलता है कंकण भूसी
जो कोई कुछ बोले
करता हूं उसे राम राम।
मेरा नाम मिलावट राम॥


नारियल तेल में पाम ऑइल डालूं
और बेसन में आटा
सरसों तेल में रिफाईन डालूं
सूरजमुखी में सोयाबीन
ताकि सरकार हो बदनाम।
मेरा नाम मिलावट राम॥
पता - ग्राम पो - झरना, बाराद्वार
जिला - जांजगीर - चांपा ( छग.)

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