इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

रविवार, 5 मई 2013

असाढ़ के फुहार

कविता

  • गणेशराम पटेल
बरसत हे जलधार
    असाढ़ के फुहार
    गरमी ह भगागे
    जी ह जुड़ागे
    चलिस आँधी, धुर्रा
    घुमरिस करिया बदरा
    बिजली चमकगे
    पानी झमाझम बरसगे
    नहावत हे रूख - राई
    हवा हे सुखदाई
धरती के करे बर सिंगार
परत हे, असाढ़ के फुहार
मेचका टर्रावत हे
मछरी इतरावत हे
रानी कीरा किंजरत हे
पिटपिटी साँप घूमत हे
सुग्घर होगे मौसम
मगन होगे मन
बोहागे नंदिया म धार
असाढ़ के फुहार
    खेत - खार , हरियारी
    तिहार हरेली , सवनही
    सुआ, ददरिया के गीत
    गाबो जंहुरिया मन - मीत
    भरही अन - जल भण्डार
    असाढ़ के फुहार
पता - ग्राम व पो. - बिरकोनी, जिला - महासमुंद (छग.)

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