इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

सोमवार, 6 मई 2013

स्‍वतंत्रता पर्व



  • संतोष प्रधान ' कचंदा' 
सारे भारत देश में, लहर - लहर लहराये तिरंगा।
स्वतंत्रता के पावन पर्व पर, जन में उठी उमंगा॥
ये भारत वर्ष हमारा, प्राणों से भी बढ़कर प्यारा।
गली - गली प्रभात फेरी में, गूँज रहा है ये नारा॥

खुशियाँ छायी जन - जन में, तन भी हो गया तिरंगा।
स्वतंत्रता के पावन पर्व पर, जन में उठी उमंगा॥
वीर बहादुर जवानों का, कर लो कुर्बानी याद।
गुलामी की जंजीर तोड़, अंग्रेजों से किया आजाद॥

आजादी की सौगात देकर, छोड़ चले सब संगा।
स्वतंत्रता के पावन पर्व पर, जन में उठी उमंगा॥
हो गयी समाप्त जब, सहनशीलता की मर्यादा।
मन में जागृत हुआ, स्वाधीनता प्राप्ति का इरादा॥

स्वाधीन किया वतन को, बहाकर खून की गंगा।
स्वतंत्रता के पावन पर्व पर, जन में उठी उमंगा॥
सारा देश ऋणि है, शहीद हुए वीर जवानों का।
सदा नत नमन करेगा, ऐसा महा वीर महानों का॥

पन्द्रह अगस्त अमर रहेगा, याद में इसकी जंगा।
स्वतंत्रता के पावन पर्व पर, जन में उठी उमंगा॥

पता - मु. - कचंदा, पो . - झरना,
व्हाया - बाराद्वार, जि - जांजगीर(छग.)

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