इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

रविवार, 5 मई 2013

आदमी के मूड़ म ..

 गीत

  • आचार्य सरोज द्विवेदी
आदमी के मूड़ ऊपर पैसा सवार होगे रे।
भुलागे धरम - करम जिनगी बजार होगे रे॥
    सुख - दुख अउ दया मया,गली में बेचावत हे।
    पइसा मंदारी होगे, सबला नचावत हे॥
    पइसा के रोग लागे नई बांचय नई बांचय।
    बड़े - बड़े गुनी मन गंवार होगे रे॥
आदमी के मूड़ ऊपर पैसा सवार होगे रे।
    पइसा हे ताकत, अऊ पइसा पहिचान हे॥
    पइसा ईमान हे, पइसा भगवान हे।
    गरीब के लइका ल दुनिया दूसर लगथे॥
    पइसा बिना जिंदगी उधार होगे रे।
आदमी के मूड़ ऊपर पैसा सवार होगे रे॥
    पइसा के खेल म, इही तो कमाल हे।
    जतके भरे हे, ओतका कंगाल हे॥
    ऐती ओती डोलत हे आंय - बांय बोलत हे।
    पइसा के भूत हा सवार होगे रे॥
आदमी के मूड़ ऊपर पैसा सवार होगे रे।
    पइसा गोहरावत हे, पइसा पोगरावत हे॥
    पइसा बर कुकुर असन, पूंछी ला डोलावत हे।
    पइसा पइसा रटथे अऊ पइसा ल भजथे॥
    पइसा के बस मं संसार होगे रे।
आदमी के मूड़ ऊपर पैसा सवार होगे रे।
पता -
ज्योतिष कार्यालय, मेन रोड, तुलसीपुर, राजनांदगांव (छग.)

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