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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

सोमवार, 6 मई 2013

दिसम्बर की रात आखिरी

  •  हरप्रसाद ' निडर' 
दिसम्बर की रात आखिरी
    नये साल का बेला है।

लल्लू अजगर मस्त पड़ा है, पीकर गंदी नाली में।
उल्लू खूब नहा रहा है, गंदी - गंदी गाली  में॥
    नया साल झमेला है।

दास गरीबा खोज रहा है, बासी घर की हाड़ी में।
अमीर ऐयाशी में लपटाया है, रंडी की साड़ी में॥
    नया साल रंगरेला है।

गोवा में नेता जी पीकर, मटक रहा है बार में।
बेटा चिलम खींच रहा है नाईनटी की रफ्तार में॥
    नया साल रसेला है।

चोर फटाका फोड़ रहा है, चढ़ ऊँची दीवार पर।
सिपाही भी झाँक रहा है, बैठे - बैठे द्वार पर॥
    नया साल का चेला है।

जुआड़ी है खेल रहा, नये साल की दांव में।
साहूकार भी बांट रहा है, दस सैकड़ा भाव में॥
    नया साल का मेला है।

युवक - युवती नाच रहे हैं, देखो दरिया पार में।
खूब मदिरा बंट रही है, पंचों के दरबार में॥
    नया साल अलबेला है।

पता - गटटानी कन्या शाला के सामने
अकलतरा रोड, जांजगीर (छग.)

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