इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

रविवार, 5 मई 2013

तँय मेहनत के ...



  • रामसाय धारिया
तँय मेहनत के करइया।
कहिथे तोला छत्तीसगढ़िया॥
    तोर मिहनत ले परबत काँपे।
    सागर छोड़े रद्दा
    खून - पसीना तँय हर बोहाथस
    सुघ्घर नांगर के जोतइया
तोला कहिथे ..............
    नानकुन पटकु पहिरे
    धरे रांपा - गैंती
    डिपरा कोड़ डबरा पाटे
    माटी म परान डरइया
तोला कहिथे ...............
    रट तोर कमा के जांगर
    भरथस सबके झोली
    गोरिया तन करिया परगे
    बोले सुघ्घर बोलिया
तोला कहिथे ...............
    जून्ना - चिथरा तोर करम म
    लिखे हे करम के रेखा
    पानी - पसिया तँय हर पीये
    खाये अंगाकर रोटिया
तोला कहिथे .................

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें