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रविवार, 5 मई 2013

ऐ संगवारी



  • विनय कुमार कश्यप
धर नांगर धर तुतारी, संग चल तंय मोर संगवारी।
जागे हे भाग किसान के, सुरूज उगे हे बिहान के॥
    ऐ संगवारी .... ऐ संगवारी

ए धरती के सेवा करले, करले खेती खार।
नदियाँ नरवा के पानी छलके धारोधार॥
    छत्तीसगढ़ के ए माटी मं
    चलव सोना उपजाबो
        ऐ संगवारी .... ऐ संगवारी
        धर नांगर धर तुतारी ...

कोइली के कुहुक बोली, बड़ मीठ लागे।
पिंयर - पिंयर सरसों के फूल महमहागे॥
    पुरवईया के सुर ताल म
    चल ददरिया गीत गाबो
        ऐ संगवारी ... ऐ संगवारी
        धर नांगर धर तुतारी ...

जुरमिल के हम गाँव ल सजाबो
छत्तीसगढ़ के नाव ल देश म जगाबो
    सुमत के रद्दा म चलव संगी
    चलव जोत नवा जलाबो
        ऐ संगवारी ... ऐ संगवारी
        धर नांगर धर तुतारी ...
पता- 1/112 चंदन, राजकिशोर नगर, बिलासपुर (छग.)

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