इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

रविवार, 5 मई 2013

रमेश चन्‍द्र शर्मा ' च़न्‍द्र ' की दो गीतिकाएं

दो गीतिकाएं
  • रमेश चन्द्र शर्मा ' चन्द्र' 
1
रात नशीली है
थोड़ी पीली है
बीज अभी रोपो
धरती गीली है
जले, जलाये क्या ?
माचिस सीली है
मन सपने देखे
तबियत ढीली है
सहल नहीं उल्फत
राह कंटीली है
मुद्राये मोहे
देह लचीली है
रूप सुदर्शन है
दृष्टि रसीली है
सत्य कहा जब से
नीली पीली है
सरल नहीं मानना
बहुत हठीली है
  • 2
कोई सरस सुन्दर है, तो है
व्यवहार अरूचिकर है, तो है

उपवन नष्ट हुआ मधुऋतु में
दोष दूसरों पर है, तो हैं

हँस मुस्कराकर ह्रदय चुराता
वह जादूगर है, तो है

उसको प्यार ज़हर लगता है
वह किसी का मुकद्दर है, तो है

हमने चाहा ही नहीं उसको
रूप का समुन्दर है, तो है

राग ही हमको नहीं दुनिया से
यह दुनिया दुस्तर है, तो है

पता - डी - 4, उदय हाउसिंग सोसाइटी, वैजलपुर, अहमदाबाद - 380051 

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