इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

रविवार, 5 मई 2013

रमेश चन्‍द्र शर्मा ' च़न्‍द्र ' की दो गीतिकाएं

दो गीतिकाएं
  • रमेश चन्द्र शर्मा ' चन्द्र' 
1
रात नशीली है
थोड़ी पीली है
बीज अभी रोपो
धरती गीली है
जले, जलाये क्या ?
माचिस सीली है
मन सपने देखे
तबियत ढीली है
सहल नहीं उल्फत
राह कंटीली है
मुद्राये मोहे
देह लचीली है
रूप सुदर्शन है
दृष्टि रसीली है
सत्य कहा जब से
नीली पीली है
सरल नहीं मानना
बहुत हठीली है
  • 2
कोई सरस सुन्दर है, तो है
व्यवहार अरूचिकर है, तो है

उपवन नष्ट हुआ मधुऋतु में
दोष दूसरों पर है, तो हैं

हँस मुस्कराकर ह्रदय चुराता
वह जादूगर है, तो है

उसको प्यार ज़हर लगता है
वह किसी का मुकद्दर है, तो है

हमने चाहा ही नहीं उसको
रूप का समुन्दर है, तो है

राग ही हमको नहीं दुनिया से
यह दुनिया दुस्तर है, तो है

पता - डी - 4, उदय हाउसिंग सोसाइटी, वैजलपुर, अहमदाबाद - 380051 

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