इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

रविवार, 5 मई 2013

रमेश चन्‍द्र शर्मा ' च़न्‍द्र ' की दो गीतिकाएं

दो गीतिकाएं
  • रमेश चन्द्र शर्मा ' चन्द्र' 
1
रात नशीली है
थोड़ी पीली है
बीज अभी रोपो
धरती गीली है
जले, जलाये क्या ?
माचिस सीली है
मन सपने देखे
तबियत ढीली है
सहल नहीं उल्फत
राह कंटीली है
मुद्राये मोहे
देह लचीली है
रूप सुदर्शन है
दृष्टि रसीली है
सत्य कहा जब से
नीली पीली है
सरल नहीं मानना
बहुत हठीली है
  • 2
कोई सरस सुन्दर है, तो है
व्यवहार अरूचिकर है, तो है

उपवन नष्ट हुआ मधुऋतु में
दोष दूसरों पर है, तो हैं

हँस मुस्कराकर ह्रदय चुराता
वह जादूगर है, तो है

उसको प्यार ज़हर लगता है
वह किसी का मुकद्दर है, तो है

हमने चाहा ही नहीं उसको
रूप का समुन्दर है, तो है

राग ही हमको नहीं दुनिया से
यह दुनिया दुस्तर है, तो है

पता - डी - 4, उदय हाउसिंग सोसाइटी, वैजलपुर, अहमदाबाद - 380051 

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