इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

रविवार, 5 मई 2013

चेहरा हिन्दुस्तान का

गीत

  • आचार्य रमाकांत शर्मा
घर - घर में हो सदाचार की
बेले फैले छितराये।
आजाद देश की कुर्बानी की
कीमत फिर से समझाये।
    सत्य , अहिंसा, महामंत्र की
    रंगोली हो द्वारों में
    भाईचारा की सुगंध हो,
    मौसम मस्त बहारों में।
जड़ से भ्रष्‍ट्रचार मिटाओ
नाश करो आतंक को,
चमचागिरी को तोड़ फेंको
बिच्छू जैसे डंक को।
    रामराज्य की मधुर कल्पना
    करना केवल सपना है,
    सभी पराये से लगते हैं
    यहाँ न कोई अपना है।
चोरी , डाका, हत्याओं का
वातावरण विषैला है,
क्योंकि विचारों और भावनाओं
का स्त्रोत ही मैला है।
    देश द्रोह है रिश्वतखोरी
    महानाश का कारण है,
    मिटटी की शपथ मिटा दो
    काम नहीं साधारण है।
रोपे पौधे हर आँगन में
सच्चाई ईमान का,
हीरा जैसे चमक उठेगा
चेहरा हिन्दुस्तान का।
पता -
' ब्रम्‍हपुरी', छुईखदान, जिला - राजनांदगांव(छग.)

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