इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

रविवार, 5 मई 2013

चेहरा हिन्दुस्तान का

गीत

  • आचार्य रमाकांत शर्मा
घर - घर में हो सदाचार की
बेले फैले छितराये।
आजाद देश की कुर्बानी की
कीमत फिर से समझाये।
    सत्य , अहिंसा, महामंत्र की
    रंगोली हो द्वारों में
    भाईचारा की सुगंध हो,
    मौसम मस्त बहारों में।
जड़ से भ्रष्‍ट्रचार मिटाओ
नाश करो आतंक को,
चमचागिरी को तोड़ फेंको
बिच्छू जैसे डंक को।
    रामराज्य की मधुर कल्पना
    करना केवल सपना है,
    सभी पराये से लगते हैं
    यहाँ न कोई अपना है।
चोरी , डाका, हत्याओं का
वातावरण विषैला है,
क्योंकि विचारों और भावनाओं
का स्त्रोत ही मैला है।
    देश द्रोह है रिश्वतखोरी
    महानाश का कारण है,
    मिटटी की शपथ मिटा दो
    काम नहीं साधारण है।
रोपे पौधे हर आँगन में
सच्चाई ईमान का,
हीरा जैसे चमक उठेगा
चेहरा हिन्दुस्तान का।
पता -
' ब्रम्‍हपुरी', छुईखदान, जिला - राजनांदगांव(छग.)

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