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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 1 जून 2013

मोर धरती के पूजा ...


  • गोपाल दास साहू
मोर धरती के पूजा करइया एक झन दिखथे गा
बाकी मोला दिखथे खुर्सी के टोरइया
नागर - कोप्पर लथपथ होथे, बइला - भइंसा सदबद होथे।
गोबर खातु राख गिल्ला हम कमाथन माई पिल्ला
भरे बरसात म बासी खाके
आगी के तपईया॥ मोर धरती के पूजा करइया ...॥

माड़ी भर पानी में खड़े रथे, मोरा - खुरमी ओढ़े रथे
नई डरे साँप डेरू ल धान के निंदइया
चिखला फुगड़ी खेले
जांगर के टोरइया॥ मोर धरती के पूजा करइया ...॥

झुमर - झुमर के धान लुवत रहिथे, सीत म पसीना चुहत रहिथे
निहर - निहर के भारा बांधे सुर के बोहइया
पड़की करमा सुवा ददरिया
खेत के गवईया॥ मोर धरती के पूजा करइया ....॥

ठक - ठक - ठक दांत बाजे, मारे जाड़ म चोला काँपे
खोररा खटियां गोरसी पहीरे लंगोटी पेरा भीतर
कहाँ पाही मच्छरदानी
कमरा के ओढ़इया॥ मोर धरती के पूजा करइया ....॥

धकधक, धकधक घाम लुरे, तीपत भोंभरा देहे लुथरे
सरी मंझनियाँ खेत - खार में कमाथे मुड़ी पछीना गोड़ चुहाथे
तामेश्वर संगी मोर
गोपाल संग रहईया॥ मोर धरती के पूजा करइया ...॥
भंडारपुर करेला,
पो.- ढारा, व्हाया - डोंगरगढ़, जिला - राजनांदगांव (छग.)

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