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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 22 जून 2013

तेरी दुनिया

 

जितेन्‍द्र कुमार साहू ' सुकुमार '

झूठों का बोलबाला सच्चाई का पलड़ा है खाली
खूब लहलहा रही है समस्याओं की बाली
इंसान बुराई का बीज बोने लगा है
देख सुकुमार तेरी दुनियां में क्या होने लगा है।

गले मिलने के बहाने गले काटने लगे हैं
बेटा अब माँ पर गोलियाँ दागने लगे हैं
हर कोई पैसों की गंगा में पाप धोने लगा है
देख सुकुमार तेरी दुनियां में क्या होने लगा है।

शैतान की तरह अमृत समस खून पीते है
दूसरों की जिंदगी लूट ऐशो आराम से जीते है
गैरों की नींद उड़ाकर खुद चैन से सोने लगा है
देख सुकुमार तेरी दुनियां में क्या होने लगा है।

राम को कौन पूछे रावण पूजे जा रहे हैं
दुसरों का हिस्सा छीनकर स्वयं खा रहे हैं
इंसान पे अब किस्मत भी राने लगा है
देख ' सुकुमार ' तेरी दुनियां में क्या होने लगा है।
  • पता - चौबे बांधा ( राजिम), जिला - रायपुर ( छ.ग.)

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