इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शनिवार, 22 जून 2013

तेरी दुनिया

 

जितेन्‍द्र कुमार साहू ' सुकुमार '

झूठों का बोलबाला सच्चाई का पलड़ा है खाली
खूब लहलहा रही है समस्याओं की बाली
इंसान बुराई का बीज बोने लगा है
देख सुकुमार तेरी दुनियां में क्या होने लगा है।

गले मिलने के बहाने गले काटने लगे हैं
बेटा अब माँ पर गोलियाँ दागने लगे हैं
हर कोई पैसों की गंगा में पाप धोने लगा है
देख सुकुमार तेरी दुनियां में क्या होने लगा है।

शैतान की तरह अमृत समस खून पीते है
दूसरों की जिंदगी लूट ऐशो आराम से जीते है
गैरों की नींद उड़ाकर खुद चैन से सोने लगा है
देख सुकुमार तेरी दुनियां में क्या होने लगा है।

राम को कौन पूछे रावण पूजे जा रहे हैं
दुसरों का हिस्सा छीनकर स्वयं खा रहे हैं
इंसान पे अब किस्मत भी राने लगा है
देख ' सुकुमार ' तेरी दुनियां में क्या होने लगा है।
  • पता - चौबे बांधा ( राजिम), जिला - रायपुर ( छ.ग.)

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