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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 29 जून 2013

इज्जत अऊ परान

 

- शरद शर्मा -

बाढ़त बेटी अऊ छटकत धान
धियान देके, देखे ला - राखे ला परथे
तभे बॉंचथे भइया, आदमी के
इज्जत अऊ परान
चोरहा - ढोरहा मन,ताकत - झांकत रहिथे
बेटी के बाप, अऊ किसान
दुनों के दशा ला एक्केच जान,
जऊन करहीं इंखर,देख - रेख म कोताही
ऊंखर हो जाही,मरे बिहान
खेत म कीरा, अऊ घर म टी.वी.
दुनो कोती के फसल मन,होवत हावंय बरबाद
चाहे कतको पढ़ाओ अऊ कतको डारव खाद
देश - परिवार के संसकिरती हा,होवत हावय विदेशी
अऊ खेत - खार म,चराय ल परत हे मवेशी
टी.वी. चैनल मन म,लाज - सरम नइ चलय,
अऊ घर म सियान के ,सियानी नइ चलय
महिनत कर - करके,मरत हे किसान
अऊ कनवा - भइरा होगे हावंय,घर - घर के सियान
  • पता - ब्राम्हा्ण पारा, राजिम, जिला - रायपुर [छ.ग.]

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