इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शनिवार, 29 जून 2013

इज्जत अऊ परान

 

- शरद शर्मा -

बाढ़त बेटी अऊ छटकत धान
धियान देके, देखे ला - राखे ला परथे
तभे बॉंचथे भइया, आदमी के
इज्जत अऊ परान
चोरहा - ढोरहा मन,ताकत - झांकत रहिथे
बेटी के बाप, अऊ किसान
दुनों के दशा ला एक्केच जान,
जऊन करहीं इंखर,देख - रेख म कोताही
ऊंखर हो जाही,मरे बिहान
खेत म कीरा, अऊ घर म टी.वी.
दुनो कोती के फसल मन,होवत हावंय बरबाद
चाहे कतको पढ़ाओ अऊ कतको डारव खाद
देश - परिवार के संसकिरती हा,होवत हावय विदेशी
अऊ खेत - खार म,चराय ल परत हे मवेशी
टी.वी. चैनल मन म,लाज - सरम नइ चलय,
अऊ घर म सियान के ,सियानी नइ चलय
महिनत कर - करके,मरत हे किसान
अऊ कनवा - भइरा होगे हावंय,घर - घर के सियान
  • पता - ब्राम्हा्ण पारा, राजिम, जिला - रायपुर [छ.ग.]

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