इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

रविवार, 9 जून 2013

नया इतिहास


  • कृष्‍णा श्रीवास्‍तव 'गुरुजी' 
अपलक निहारते
भर लेना चाहता हूं
सारी रश्मियां
आंखों में
तुम्हारा तेज .....
सूरज
    कर सकूं
    आलोकित,पथ
    तपस को फाड़
    दे सकूं नव संदेश
    कथित स्वर्ग के लिए
    सूरज
मैं सोचता हूं
क्या होगा उनका
जो तोड़ते हैं अनुबंध
भरते हैं दम
कृत्रिम ऊर्जा से .....
सूरज
    लूट कर भी
    भरा है कटोरा
    क्षणिक व्यवधान
    खत्म नहीं करती .... जिन्दगी
    चमकता है कनक तपकर ...
    सूरज
मेरे अंदर
संचारित रक्त
लिखेगी नया इतिहास
शाश्वत ... निरंतर
बहुत कुछ मिल रहा है .... तुमसे
सूरज
  • संकल्प, दिग्विजय कालेज रोड, जमातपारा, राजनांदगांव (छग.)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें