इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शनिवार, 1 जून 2013

बेरोजगारी



  • जितेन्द्र चंद्राकर
अपन जांगर ल थको के संगी मोला गजब पढ़हावत हे
कहूं करा काम मिल जाही कहिके सपना ला सजावत हे
    अपन पेट ला भूख मार के मोला बने खवावत हे
    दिन भर घर ल छोड़ के संगी प्लाँट म कमावत हे
पढ़े जाथे लइका कहिके बने - बने पहिरावत हे
पुलिसवाला बन जाही कहिके सपना ल सजाइस
    महु मोर काम करेंव फारम ला भरेव
    महिना भर दउड़ेन - घूपेन कोनो काम नइ आइस
दू लाख रूपिया मांगिस उही कर घर के मन थराइस
कहाँ ले देतेओं मेहर रूपिया
    गरीबी म जन्म ले हंव गरीबी म बढ़ेव
    लांघन भूखन रहिके संगी दिन गिन बारबीं पढ़ेव
उही करा समझ गेंव संगी
रूपिया के मोल होगे डिग्री होगें सस्ता
    कतरो पढ़ेन लिखेन संगी कोनो काम नई आवत हे
    कतरो पढ़े - लिखे मन टीपीन म बासी धर प्लाट म कमावत हे
कतरो मन फांसी लगावत हे कतरो जहर ल खावत हे
बेरोजगारी ह लेवत हे कतरो के परान
खोजे म काम नई मिले प्राण ल कहाँ ओधान
  • ग्राम - धामनसरा, पो - सुरगी जिला - राजनांदगांव ( छग.)

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