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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 22 जून 2013

थोकन बइठ ले


  • बिहारी साहू 
आगी अंगरा कस गा, जरत हवय भोंमरा थोकन बईठले
थोकन बईठ ले किसान, आगे नवा बिहान थोकन बईठले॥
    सावन भादो राँय - राँय, करे हस किसानी।
    कभु बईठ के खावस नहीं, जरगे जिनगानी॥
    बड़े बिहने साँझ कन तैं खाए जुड़ बासी।
    खेत - खार के पानी पिए फेर, अइस नई खाँसी॥
    टुटगे पट्टी रगरा तोर पटका होगे भोंगरा।
थोकन बइठ ले ...............................॥
    माड़ी भर के चिखला म दिन बुड़त ले कमाए।
    कतको थक जाथस फेर गोड़ नई लमाए॥
    चुटुर - चुटुर मच्छर चाबे, गिरय गजब पानी।
    भुनुन - भुनुन गोड़ हाथ म, गजब झुमय मांछी॥
    नांगर जोताये नंगरिहा, सुग्घर गावत हे ददरिया।
थोकन बइठ ले ..................................॥
    चना चाबे कस दाँत, कटर - कटर बाजे तोरे।
    नींदे धान खुमरी अऊ मनकप्पड़ ओढ़ के॥
    धान डोली ल निंदत, कभू हंसिया हा सटकगे।
    पांवे म केंदुवा अऊ ऐड़ी हा चटकगे॥
    रुप हवे करिया फेर दिखथे गजब बढ़िया।
थोकन बइठ ले ...................................॥
  • ग्राम - धारिया, तहसील - छुईखदान, जिला - राजनांदगांव (छ.ग.)

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