इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शनिवार, 22 जून 2013

थोकन बइठ ले


  • बिहारी साहू 
आगी अंगरा कस गा, जरत हवय भोंमरा थोकन बईठले
थोकन बईठ ले किसान, आगे नवा बिहान थोकन बईठले॥
    सावन भादो राँय - राँय, करे हस किसानी।
    कभु बईठ के खावस नहीं, जरगे जिनगानी॥
    बड़े बिहने साँझ कन तैं खाए जुड़ बासी।
    खेत - खार के पानी पिए फेर, अइस नई खाँसी॥
    टुटगे पट्टी रगरा तोर पटका होगे भोंगरा।
थोकन बइठ ले ...............................॥
    माड़ी भर के चिखला म दिन बुड़त ले कमाए।
    कतको थक जाथस फेर गोड़ नई लमाए॥
    चुटुर - चुटुर मच्छर चाबे, गिरय गजब पानी।
    भुनुन - भुनुन गोड़ हाथ म, गजब झुमय मांछी॥
    नांगर जोताये नंगरिहा, सुग्घर गावत हे ददरिया।
थोकन बइठ ले ..................................॥
    चना चाबे कस दाँत, कटर - कटर बाजे तोरे।
    नींदे धान खुमरी अऊ मनकप्पड़ ओढ़ के॥
    धान डोली ल निंदत, कभू हंसिया हा सटकगे।
    पांवे म केंदुवा अऊ ऐड़ी हा चटकगे॥
    रुप हवे करिया फेर दिखथे गजब बढ़िया।
थोकन बइठ ले ...................................॥
  • ग्राम - धारिया, तहसील - छुईखदान, जिला - राजनांदगांव (छ.ग.)

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