इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शनिवार, 22 जून 2013

उजाले की नीयत कहानी संग्रह पर विचार गोष्‍ठी संपन्‍न


राजनांदगांव। अंचल की साहित्यिक संस्था साकेत साहित्य परिषद सुरगी द्वारा परिषद के संरक्षक एवं साहित्यकार कुबेर सिंह साहू द्वारा रचित कहानी संग्रह ' उजाले की नीयत' पर समीक्षा गोष्ठी का आयोजन बसंतपुर में किया गया।
संस्था के सलाहकार ओमप्रकाश साहू ' अंकुर ' ने कहा कि उजाले की नीयत के माध्यम से लेखक ने व्याप्त आडम्बर, अराजकता, दिखावा एवं बनावटीपन को बखूबी चित्रित किया है। श्री साहू की भाषा शैली चुटीली एवं प्रवाहमयी है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समीक्षक एवं साहित्यकार डॉ. शंकर मुनिराय ने कहा कि श्री साहू  की कहानी व्यंग्य संग्रह है - पुलिस वाले का छापा कहानी में यह  स्पष्ट देखा जा सकता है। कहानी की शैली में बिल्कुल नयापन है । भाव तथ्य में नयापन नहीं हैं जबकि रचनाओं में नयापन होना चाहिए। नारी जीवन की विकलता को लेखक ने बेबाक और सधे हुए ढंग से प्रस्तुत किया है। कुल मिलाकर संग्रह में संग्रहीत कहानियाँ पूर्णत: कहानियाँ नहीं है कुछ व्यंग्य है तो कुछ कहानी जिसमें लेखक अपने भावों को अभिव्यक्त करने में पूर्णत: सफल हुआ हैं।
 कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. आर. पी. कोसरिया ने कहा कि कुबेर की कहानियाँ व्यंग्य से भरी हुई है। कहीं - कहीं विधा से हटकर अतिक्रमण होने के कारण कुछ कहानियाँ संदेह के घेरे में हैं फिर भी कथ्य सप्रेषण में ये पूर्णत: सफल है।
वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य सरोज द्विवेदी ने कहा कि उजाले की नीयत तो साफ होती है परन्तु जो उजाले की नीयत पर शंका करे वही साहित्यकार है। उन्होंने कहा कि कथा लेखन में राजनांदगांव का बहुत पुराना इतिहास रहा है। बीसवीं सदी में बख्शी जी इसके प्रमाण थे। इक्कीसवीं सदी के प्रारंभ में कुबेर सिंह साहू तथा सुरेश सर्वेद का नाम कथा लेखन में अग्रणीय है। आत्माराम कोशा ' अमात्य', ए. के. द्विवेदी, गोपाल सिंह कलिहारी, यशवंत मेश्राम, सुरेश सर्वेद,ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम के द्वितीय चरण में कवि गोष्‍ठी का सफल आयोजन किया गया जिसमें वीरेन्द्र तिवारी ' वीरु', कुलेश्वर दास साहू, लखन लाल साहू ' लहर', फकीर प्रसाद साहू, पवन यादव 'पहुना' दिनेश नामदेव, गैंदलाल साव '' दीया '', महेन्द्र बघेल मधु, अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा, गिरीश ठक्कर, खेलन साहू, नरेन्द्र तायवाड़े ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का संचालन ओमप्रकाश साहू ' अंकुर ' ने किया। आभार व्यक्त कुबेर साहू ने किया।
टोटल बकवास कविता संग्रह विमोचित
टोटल बकवास का विमोचन करते महापौर नरेश डाकलिया,सम्‍पादक शरद कोठारी रवि श्रीवास्‍तव एवं लेखक गिरीश ठक्‍कर





राजनांदगांव। व्यंग्यकार गिरीश ठक्कर ' स्वर्गीय' द्वारा रचित व्यंग्य संग्रह टोटल बकवास का विमोचन छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के तत्वावधान में महाजन बाड़ी में गत दिनों महापौर नरेश डाकलिया के मुख्य आतिथ्य एवं वरिष्ठ साहित्यकार एवं सम्पादक शरद कोठारी की अघ्यक्षता में किया गया।
विमोचन अवसर पर उपस्थित रचनाकार एवं गणमान्‍य नागरिकगण
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शरद कोठारी ने कहा कि व्यंग्य विधा विलुप्ति के कगार पर है। यह सत्ता का विरोध करने वाली विधा है। इसलिए हम लिखने से डरते हैं। इसमें राजनीतिक दृष्टि आवश्यक है। आक्षेप या लतीफेबाजी तक सीमित न हो।
महापौर नरेश डाकलिया का स्‍वागत करते सुरेश सर्वेद
व्यंग्यकार त्रिभुवन पांडे ने कहा कि मानवता पर आस्था और इसकी रक्षा के लिए संघर्ष भी जरुरी है। व्यंग्य में संघर्ष होता है। बिना प्रयोजन व्यंग्य नहीं लिखा जा सकता। टोटल बकवास इसकी पुष्टिï करता है। गीतकार मुकुंद कौशल ने कहा कि जॉब ओरियेन्टेड शिक्षण पद्धति के दौर में टोटल बकवास जैसे साहित्य साधना हिन्दी साहित्य के विकास की आशा जगाता है। वरिष्ठï व्यंग्यकार रवि श्रीवास्तव ने कहा कि गिरीश को चाहिए कि वे गद्य में भी  लिखे और पाठक वर्ग तैयार करें। डॉ. शंकर मुनि राय ने जहां व्यंग्य को अंतत: एक विध ही कहा वहीं रायपुर से पधारे चेतन भारती ने कम शब्दों में अधिक बात कह सकने की अदï्भुत क्षमता बताया। श्री पथिक ने टोटल बकवास में चुभने वाली क्षणिकाओं को रेखांकित किया तो डोंगरगढ़ से पधारी कथाकार शुभदा मिश्र ने समानांतर व्यंग्य कथा का पाठ कर कृति को प्रोत्साहना दी। संचालन कर रहे कवि दादूलाल जोशी ने कहा कि टोटल बकवास क्षणिकाओं का संग्रह है। क्षणिकाएं ऐसी रचनाएं है जो क्षण भर में परिवेश को परिवर्तित कर दे, जैसे क्षण भर का सही निर्णय मनुष्य के जीवन को बदल देता है। साहित्यकार कुबेर साहू ने कहा कि व्यंग्य की सर्वव्यापकता स्वयं सिद्ध है। परसाई और जोशी की प्रखर मेघा ने इसे विधा मान्य करने पर विवश किया और यदि यह सच है तो व्यंग्य, गद्य की विधा होनी चाहिये, पद्य की नहीं। यदि व्यंग्य गद्य - पद्य दोनों में व्यक्त है तो यह विधा नहीं शैली है।इस अवसर पर कार्यक्रम में पधारे वरिष्ठ साहित्यकारों का शाल व श्रीफल भेंट कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में आचार्य सरोज द्विवेदी, ठा. नरेन्द्र सिंह, बी. एल. श्रीवास्तव, बहल सिंह पवार, शंकर सक्सेना, आत्माराम कोशा ' अमात्य ', सुरेश सर्वेद, पदमलोचन शर्मा, अनिलकांत बख्शी, ताजिंदर भाटिया, किशोर मिश्रा, रमेश, एच. एल. बोरकर, प्रकाश साहू ' वेद ', सौरभ ठक्कर, गैंदलाल साहू, राजेश जगने ' राज', दिनेश नामदेव, पवन यादव ' पहुना ', गौतम चंद्राकर,आभा श्रीवास्तव, आनंद श्रीवास्तव, मोहन सिंह, डॉ. पी. शर्मा, चन्द्रभूषण बच्चन आदि उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन गिरीश ठक्कर ने किया।
  राष्‍ट्रीय ख्‍याति के दिव्‍य पुरस्‍कार घोषित
भोपाल। शीर्ष ऐतिहासिक उपन्यासकार, कवि एवं चित्रकार स्वगीँय अम्बिका प्रसाद दिव्य की स्मृति में साहित्य सदन, भोपाल द्वारा विगत 13 वर्षों से दिये जा रहे राष्ट्रीय ख्याति के अत्यधिक चर्चित दिव्य पुरस्कारों की घोषणा विगत 7 मार्च 2010 को होटल आमेर पैलेस के सभागार में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में की गयी।
पुरस्कारों की घोषणा मुख्य अतिथि एवं खण्डवा के वन संरक्षक शशि मलिक ने की। वर्धा के शंम्भू दत्त सती को उपन्यास ओ इजा, डॉ उषा अग्रवाल कुरूक्षेत्र को कथा संग्रह '' सोने का पिंजड़ा '' तथा श्री शैलेय उद्यमसिंह नगर को काव्य संग्रह के लिए प्रतिष्ठित दिव्य पुरस्कार देने की घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त श्री गदाधर नारायण लखनऊ तारकनाथ उपन्यास, डॉ. नताशा अरोड़ा नोएडा बहुरंगी कहानियां, श्री किशन तिवारी भोपाल मैं तुम हो जाऊ काव्य, श्री मोहन चंद्र त्रिपाठी इटावा छूकर उजले पंख काव्य, डॉ दिनेश कुमार शर्मा कासगंज मिथक और दिनकर आलोचना, डॉ स्वाति तिवारी भोपाल अकेले होते लोग निबंध संग्रह, डॉ. अंजु दुआ जैमिनी फरीदाबाद मोर्चे पर स्त्री निबंध संग्रह, डॉ चंद्रकांत मेहता अहमदाबाद चलना हमारा काम है निबंध संग्रह, श्री अमृतलाल मदान कैथल माया मृग नाटक, श्री अनुज खरे भोपाल चिल्लर चिंतन व्यंग्य, डॉ. राज गोस्वामी दतिया ओंछे वार ककई से लोक साहित्य, डॉ. जलज भादुड़ी कोलकाता सुनील गंगोपाध्याय की कहानियों का अनुवाद, श्री वेदप्रकाश कंवर दिल्ली दरवाजे खुल गये बाल साहित्य, एवं डॉ. भैरुलाल गर्ग भीलवाड़ा बाल वाटिका पत्रिका को अम्बिका प्रसाद दिव्य - रजत अलंकरण प्रदान करने की  घोषणा की गई। दिव्य पुरस्कारों के संयोजक एवं दिव्यालोक पत्रिका के संपादक श्री जगदीश किंजल्क ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि दिव्य पुरस्कारों के लिए साहित्य की अनेक विधाओं की 135 कृतियाँ प्राप्त हुई थी। पुरस्कार घोषणा समारोह की अध्यक्षता नागालैण्ड के पूर्व राज्यपाल पदमश्री ओ. एन. श्रीवास्तव ने की। इस अवसर पर आपने कहा कि दिव्य पुरस्कारों को मीडिया का सहयोग निरन्तर मिल रहा है, यह प्रसन्नता की बात है। दिव्य जी का साहित्य कालजयी है। पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष श्री मोती सिंह पूर्व आई . ए. एस. ने कहा - दिव्य जी जैसे साहित्यकार, चित्रकार बिरले ही पैदा होते हैं। दिव्य पुरस्कार साहित्य जगत की अदभुत उपलब्धि है। श्री जगदीश किंजल्क ने बताया कि दिव्य पुरस्कारों के निर्णायक मंडल के सदस्य हैं - श्री मोती सिंह, श्री रामेश्वर मिश्र पंकज,श्री प्रभुदयाल मिश्रा, श्री हरि जोशी, श्री नरेन्द्र दीपक, श्री विजयदत्त श्रीधर, श्री प्रियदर्शी खैरा, श्री माताचरण मिश्र, डॉ. जवाहर कनावट, श्री कुमार सुरेश, प्रो. आनंद वर्धन, श्री कैलाश नारायण शर्मा, श्रीमती विजयलक्ष्मी विभा, एवं श्री जगदीश किंजल्क।
घोषणा समारोह का शुभारंभ प्रसिद्ध कवयित्री एवं दिव्य जी की छोटी सुपुत्री श्रीमती विजय लक्ष्मी विभा के पद गायन से हुआ। वरिष्ठï पत्रकार श्री घनश्याम सक्सेना ने सभी पत्रकारों का आभार माना। इस अवसर पर दिव्यालोक की प्रबंध संपादक श्रीमती राजो किंजल्क भी उपस्थित थी।

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