इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

सोमवार, 24 जून 2013

कलयुगी अमृत , आम इमली

  • आचार्य सरोज व्दिवेदी 
समुद्र मंथन के बाद जो अमृत का घड़ा निकला, उसके लिए देवासुर संग्राम हुआ। विष्णुजी की कला से सारा अमृत देवतागण पी गए फिर भी राक्षस लड़ते रहे और घड़ा फोड़ डाले, घड़े में अमृत की कुछ बूंदें फिर भी बाकी थी। जिन्हें रौंद डाला गया। विष्णु जी जब जाने लगे तो घड़े के टुकड़ों पर फैले अमृत कणों ने निवेदन  किया, प्रभु आपने अमृत को बड़ा ऊंचा स्थान दिया है। किंतु हमारी यहां बड़ी दुर्गति हुई है, अब तो हमें उबार लीजिए।
- चिंता मत करो, भगवान विष्णु ने कहा - यहां पर एक पौधा उगेगा जो धीरे - धीरे फैलता जाएगा। इन पौधों की पत्तियों से कलयुग में एक पेय बनाया जाएगा जो अमृत की तरह ही होगा। लोग प्रतिदिन उसका सेवन करेंगे और अतिथि सत्कार भी करेंगे। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि लोग उस पेय को उसी तरह के बर्तनों में ग्रहण करेंगे जैसे ये घड़े के टुकड़े फूटे पड़े हैं इसे पूरे संसार में ख्याति मिलेगी।
कुछ लोग कहते हैं कि विष्णु जी का वह वरदान चाय है।
आम इमली
नेता - देखो, चमचामल जी, इस गोल हरे फल को लोग आम कहते हैं जबकि मैं कहता हूं कि यह इमली है लेकिन लोग मेरी बात ही नहीं मानते । हमको कुछ समझते ही नहीं।
चमचामल - हुजूर, यहीं तो लोकतंत्र मार खाता है। लोग आम को समझते हैं, इमली कहने वाले को नहीं। लेकिन आपने जब कह दिया तो यह इमली ही है। आम हो ही नहीं सकता और सिद्ध करना मेरा काम है।
नेता जी- शाबाश चमचामल, हमें तुमसे यही उम्मीद थी। लोगों को तुम बता दो कि यह आम नहीं इमली हैं क्योंकि हम बोल रहे हैं।
जनता - यह आम है और वह नेता का बच्चा बोलता है कि यह इमली है।
चमचामल - आप लोग शांत रहे। आम को इमली कोई नहीं बना सकता। नेता जी को भ्रम हो गया है समय आने पर सत्य सामने आ जाएगा।
अधिकारी - चमचामल जी, नेताजी इसे इमली बोल रहे हैं और जनता कहती है कि यह आम है। अब आप ही बताइए कि हम इस पर कैसे कार्यवाही करें।
चमचामल - अजी आप लोग पढ़े - लिखे जरूर हैं लेकिन समझते कुछ नहीं अधिकारी लोकतंत्र में जनता और सरकार के बीच की कड़ी है और ठीक कड़ी वही है जो किसी का पक्ष न ले आपको न आम से मतलब न इमली से। लिख दीजिए - खट्टा फल।
  • ज्‍योतिष कार्यालय, तुलसीपुर , राजनांदगांव (छग)

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