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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शुक्रवार, 14 जून 2013

कुसियार माड़े हे



  •  डा जीवन यदु
दीया के खाल्हे जतका अंधियार माढ़े हे ।
बस ओतके मा दीया के संसार माढ़े हे ।।

मोर आगू मा भभके संगी ! जिनगी के होले,
पन तोर आगू होले के तिहार माढ़े हे ।

वो मनखे जब मोला मिलथे, तब अइसे लगथे,
मोर आगू मा आजे के अखबार माढ़े हे ।

हाँ मा हाले मुड़, कै ना मा, पन अइसे हाले,
पगड़ी ऊपर जइसे कुकरी - गार माढ़े हे ।

पेट - बिकारी के झंझट के बीच  मं तोरे सुरता,
बॉंस के जंगल मा जइसे कुसियार माढ़े हे ।

वो कइसे हरियर चारा के ले सकही सुवाद,
जे बोकरा के चेथी मा तलवार माढ़े हे ।

  • दाऊ चौरा , खैरागढ़, जिला - राजनांदगांव (छ.ग.)

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