इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शुक्रवार, 14 जून 2013

कइसन बछर आगे


  • देवनारायण निषाद
बछर बितगे आज के, नइ देखेन अइसन बदलावा
आषाढ़ सावन के महिना मा, बदलगे हमर पहनावा
जेन महिना घनघोर पानी गिरे, ओ महिना ठनठन ले सुखागे
घाम आगी कस मुड़ म परिस ते, चुंदी चि किन सिरागे
कइसन बछर आगे संगी, कइसन बछर आगे ।

किसानी के हहा तता, खुमरी झिल्ली हा सिरागे
अंगरा कस दहकत घाम म, माथा घलो पिरागे
बटकी भर बासी, अउ मार सिलपट्टा के चटनी
दहकत गोरसी के आगी, अंगेठा असन हा नंदागे
कइसन बछर आगे संगी, कइसन बछर आगे ।

रगरग ले घाम करथे, लगथे बरसा ही सिरागे
फेर बिहिनिया देखले, गली चौरा चिखला मा सड़बड़ागे
बिहनिया के झगरा अऊ संझा के पानी किस्सा घलो नंदागे
गरजना ऐसे लागथे, जैसे छानी छप्पर उप्पर मा उड़ागे
कइसन बछर आगे संगी, कइसन बछर आगे ।

तीजा - पोरा के ठेठरी, खुरमी ल, ठठरंग ठठरंग चाबन
कमरा ओढ़न जाड़ म, हूहू हूहू आगी ला तापन
महतारी लइका ला लोरी सुनात कथे, ददा चरबज्जी खेत जाही
चार ले पांच  बजगे, अऊ कुकरा घलो बासे ला भूलागे
कइसन बछर आगे संगी, कइसन बछर आगे ।
ग्राम व पोष्‍ट - गिरौद, वि. ख. - मगरलोड, तह. - कुरूद, जिला - धमतरी (छ.ग.)

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