इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शनिवार, 29 जून 2013

मेरे गीतों में आओ



- रमाकांत शर्मा -

मेरे गीतों में आओ
मेरे गीतों में आओ।
अधंकार के आंगन में
गीतों के दीप जलाओ - मेरे गीतों में आओ।
मेरे गीतों में टीस
वेदना पीड़ाये हैं
आँखों के दर्पण में
दिखती धाराएं हैं।
मन उमंग में डूब न जाये
तुम इतना समझाओं - मेरे गीतों में आओ।
जब दर्द सीढ़ियाँ चढ़ता
जीवन गीतों को पढ़ता
आह, गीतों की जननी
जगती को यही बताओं - मेरे गीतों में आओ।
जिद्दी मन कहता मुझसे
तारों को पास बुलालों
श्रम है बहुमूल्य सृजन में
गीतों में उसको ढालों।
मत पकड़ों कल - छल का आँचल
जग शान्ति मंत्र अपनाओ - मेरे गीतों में आओ।
होती विभोर जब कविता
मन नाच - नाच मुस्काता
इक तारा में गीतों को
अंधत्व विवश हो गाता।
पिपासु एक मृगछौना
मानव हो प्यास बुझाओ - मेरे गीतों में आओ।
  • पता - ब्राम्‍हाणपारा, छुईखदान, जिला - राजनांदगांव [छ.ग.]

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