इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 26 जून 2013

जीवन के विभिन्न रंग दिखाती कहानियां

 

  •  समीक्षक - ओमप्रकाश कादयान

साहित्यकार, चित्रकार, सम्पादक व कुशल अनुवादक कृष्ण कुमार अजनबी कई भाषाएं जानने वाले प्रतिभावान व्यक्ति हैं। ओडिया और हिन्दी दोनों भाषाओं में निरन्तर लिख रहे हैं। कविता, हाइकु, कहानी, बाल साहित्य इनकी मूल विधा है तथा देश- विदेश की प्रमुख पत्र- पत्रिकाओं में ये निरन्तर छपते रहते हैं। इनके द्वारा बनाए रेखांकन भी प्रमुखता से छपते रहते हैं। इनके साथ- साथ ये जो एक बड़ा कार्य कर रहे हैं वो हैं हिन्दी से उड़िया तथा उड़िया से हिन्दी में अनुवाद। इससे दोनों भाषाओं के पाठको जहां अच्छी रचनाएं पढ़ने को मिल जाती है, वही लेखको को विस्तार व प्रोत्साहन भी मिलता है। अनुवाद के जरिये नि: संदेह अजनबी जी दोनों भाषाओं के बीच एक सेतु का कार्य कर रहे है।
   अनुवाद की इसी कड़ी में कृष्ण कुमार अजनबी ने पिछले दिनों ओडिया के प्रसिद्ध कथाकार डॉ. अर्चना नायक की कहानियों का अनुवाद हिन्दी में किया है।
   प्रख्यात कथा लेखिका डॉ. अर्चना नायक की अब तक तीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। दस कहानी संग्रह, पाँच नाटक व एकांकी संकलन, दस निबंध व समीक्षा पुस्तकें, तीन जीवनियां एवं दो अनुवाद ग्रंथ सम्मिलित है। साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए सन् 1968 से 2010 के मध्य पचीस सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। अलौकिक कथा लेखिका डॉ. अर्चना नायक का नौवा तथा हिन्दी में अनुवादित पहला कहानी संग्रह है।
  श्री अजनबी द्वारा अनुवादित पुस्तक अलौकिक और अन्य कहानियां में डॉ. अर्चना नायक द्वारा लिखी कुल बारह कहानियां अलौकिक, काल्पनिक सत्य, कुहासा पंछी, चमत्कार, छाया दर्शन, जादुई आईना, तिलिस्मी रात, तीसरी औरत, दादी, यंत्ररूपेण, विश्वास का देवता, स्वप्न गोधूली के संकलित है जो जीवन के विविध रंगों को दर्शाती हैं।
  इनकी कहानियों में समाज का हर तबका अपनी- अपनी समस्याओं, संघर्षों से जूझता नजर आता है। लेखक ने समाज की कड़वी सच्चाईयों को उजागर किया है तथा दार्शनिक अवधारणाओं, मिथको, सांस्कृतिक प्रतीको के साथ अपने समय का खूब सामंजस्य बिठाया है।
  नैतिक व सांस्कृतिक विघटन, मूल्यहीनता, मनुष्य का मनुष्य से बढ़ता दुर्व्यवहार, स्वार्थ, छल-कपट, धन मोह में होते अत्याचार, अपनो से बढ़ती दूरी, सत्ता का  मोह समाज को किस तरफ ले जा रहा है, इन सभी चिन्ता, चिन्तन इस संग्रह में है। संग्रह की कहानियों में आम आदमी का रोटी व अपने हक के लिये संघर्ष है तो आजादी के लिये छटपटाती औरत की कथा भी है।
  लेखक ने इन कहानियों में स्त्री मन की संवेदना को भी सूक्ष्मता से व्यक्त किया है। संग्रह की सभी 12 कहानियां अपने समय के समाज का आईना है।
  प्रस्तुत संकलन में जीवन से जुड़ी अतीन्द्रिय जगत की कुछ ऐसी बेमिसाल रोचक कहानियां उपलब्ध है, जिसे हिन्दी साहित्य में बेशक दुर्लभ कही जा सकती है। अर्चना जी के उम्दा कथा वस्तु संयोजन, दमदार चरित्र चित्रण, प्रवीण वाक्पटुता तथा निर्मल भावप्रधान उत्कृष्ट भाषा शैली दृष्टव्य एवं बोधगम्य है। अपनी अद्भुत कल्पनाशीलता से जिज्ञासु पाठकों के चित्त को तत्वपरक एवं तथ्यपूर्ण तृप्ति प्रदान करना ही मानों उनकी प्रत्येक कहानी की विशेषता है।
  अर्चना जी की लगभग सभी कहानियां यूं तो नि: संदेह दीर्घ होती है परन्तु प्रत्येक कहानी में पाठकीय रोचकता अन्त तक बनी रहती है।
  डॉ. अर्चना नायक की कहानियों में प्रेमचंद जी की अपेक्षाओं के अनुरूप दोनों ही कथा आवश्यकताओं का निर्वाह हुआ है। अलौकिक संग्रह की कहानियों में मनोरंजन भी है और मानसिक तृप्ति भी। एक बार पाठक कहानी पढ़ना प्रारंभ कर दे तो वह उसे समापन के पूर्व छोड़ नही सकता।
  युवाकवि, कथाकार, चित्रकार एवं अनुवादक कृष्ण कुमार अजनबी द्वारा अनुवादित डॉ. अर्चना नायक की इन कहानियों को पढ़ते हुए पाठक का अनुभव संसार समृद्ध होता है। संग्रह की अधिकतर कहानियां रचनात्मकता, नामकरण की सार्थकता, कथात्मकता की दृष्टि से स्तरीय हैं। भाषा सहज, सरल व प्रभावात्मक है। पुस्तक कॅवर आर्कषक व संग्रह के अनुरूप लगता है। पुस्तक की छपाई स्तरीय तथा प्रूफ की गलतियां न के बराबर हैं।
  • पता - 234, सेक्टर - 13, हिसार हरियाणा - 125005

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें