इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 19 जून 2013

उग्रवाद को


  • जोगीराम वर्मा 
अगर हो सके जो तुमसे, बस इतना तो रहम करना।
सारे उग्रवाद को मेरे हवाले करना॥

तुम हो गये निकम्मे, ये जान सब गये हैं।
तुमको सलाह मेरी, अपनों से डरते रहना॥

तुमने है जो भी पहना, है साँप का बसेरा।
मेरी कहा को मानो, आस्तीनहीन ही रहना॥

कुर्सी के दौर में तूने, ईमान बेच डाला।
मेरे लिए भी थोड़ा ईमान बचाए रखना॥

तूने ही तो बढ़ाया, इन उग्रवादियों को।
भाया तो कत्ले आम का, लहू ही लखते रहना॥

तूने तो हिफाजत के, वादे किये थे झूठे।
मुझको कभी न भाया, तेरी अश्क का बहना॥

गर मिट सके मिटा दे, इन उग्रवादियों को।
सुख - शांति के चमन को, सुख से संजोये रखना॥
  • ग्राम - कुटेला भाठा, जिला - दुर्ग(छ.ग.)

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