इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

मंगलवार, 4 जून 2013

श्रम गीत : जिंहा जांगर


  • डाँ. पीसी लाल यादव
जिहाँ जांगर, तिहाँ जिनगी, अऊ उहें उजियार हे,
जिहॉ परन हे, जिहॉ लगन हे, उहें अमरित धार हे।

    बाँहा के भरोसा म भईया,
    पानी ओगरथे पथरा म।
    मन म हे सक्ति - साधन त
    सोन उपजथे कँकरा म॥
जिहाँ बाँहा, जिहाँ बल हे, उहें खुसी के संसार हे।
जिहॉ जांगर ...............................................।

    साधन के का रोना - धोना,
    साधन हे तोर हाथ म।
    बजूर कस बांहा - छाती
    जांगर हवय साथ म॥
जिहाँ सुम्मत तिहाँ सम्पत्ति, उहें सरग के दुवार हे।
जिहाँ जांगर ...............................................।

    करनी कुछ अइसे करले
    के मुच - मुच हाँसे जिनगी ह।
    गढ़ अइसन पैडगरी जेमा
    रेंगय तोर साथी संगी ह॥
जिहाँ संगी जिहाँ साथी, उहें जिनगी तिहार हे।
जिहाँ जांगर ...........................................।
  • गण्डई - पंडरिया, जिला - राजनांदगांव ( छग.) मो. 9424113122

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