इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

मंगलवार, 4 जून 2013

श्रम गीत : जिंहा जांगर


  • डाँ. पीसी लाल यादव
जिहाँ जांगर, तिहाँ जिनगी, अऊ उहें उजियार हे,
जिहॉ परन हे, जिहॉ लगन हे, उहें अमरित धार हे।

    बाँहा के भरोसा म भईया,
    पानी ओगरथे पथरा म।
    मन म हे सक्ति - साधन त
    सोन उपजथे कँकरा म॥
जिहाँ बाँहा, जिहाँ बल हे, उहें खुसी के संसार हे।
जिहॉ जांगर ...............................................।

    साधन के का रोना - धोना,
    साधन हे तोर हाथ म।
    बजूर कस बांहा - छाती
    जांगर हवय साथ म॥
जिहाँ सुम्मत तिहाँ सम्पत्ति, उहें सरग के दुवार हे।
जिहाँ जांगर ...............................................।

    करनी कुछ अइसे करले
    के मुच - मुच हाँसे जिनगी ह।
    गढ़ अइसन पैडगरी जेमा
    रेंगय तोर साथी संगी ह॥
जिहाँ संगी जिहाँ साथी, उहें जिनगी तिहार हे।
जिहाँ जांगर ...........................................।
  • गण्डई - पंडरिया, जिला - राजनांदगांव ( छग.) मो. 9424113122

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