इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शनिवार, 29 जून 2013

अम्मा

 

- आलोक तिवारी   -

सूना चौरा देख के, बिटिया को याद आई अम्मा।
तेरे जाने के बाद से, तुलसी नहीं हरियाई अम्मा।।

रोने की आवाज सुनकर, दौड़ी - दौड़ी आती अम्मा
लाख जतन करके,मुझको चुप कराती अम्मा
पलना हिलाते - हिलाते, खुद भी सो जाती अम्मा
मेरी इक हंसी पे, कितना खिलखिलाती अम्मा
तेरे जाने के बाद से, तुलसी नहीं हरियाई अम्मा।।

बिन्दी - चूड़ी - फीते से दुल्हन सी सजाती अम्मा
रुठूं तो देर तक प्यार से बहलाती अम्मा
घर में छुप जाऊ कहीं मन में घबराती अम्मा
रोज रात को परियों से, कहानी में मिलवाती अम्मा
तेरे जाने के बाद से, तुलसी नहीं हरियाई अम्मा।।

तीज - त्योहार - शादी में मुझको संग ले जाती अम्मा
रिश्ते - नातों का मतलब प्यार से समझाती अम्मा
संस्कारों की चाश्नी में हौले - हौले डुबाती अम्मा
बिटिया को गढ़ने में तन - मन अपना लुटाती अम्मा
सूना चौरा देख के, बिटिया को याद आई अम्मा
तेरे जाने के बाद से, तुलसी नहीं हरियाई अम्मा।।

रिश्ते के वास्ते सबको संदेश भिजवाती अम्मा
बात पक्की होने पर सौ - सौ खुशी मनाती अम्मा
विदा करने की घड़ी, आँसुओं से भर जाती अम्मा
सूने - सूने आँगन में तन्हा खड़ी रह जाती अम्मा
सूना चौरा देख के, बिटिया को याद आई अम्मा
तेरे जाने के बाद से, तुलसी नहीं हरियाई अम्मा।।

तुमको गये बरसों बीते, पल - पल याद आती अम्मा
सोच के हँसी आती, कभी रुलाती अम्मा
घर में छुप जाऊ कहीं, मुझको नहीं बुलाती अम्मा
सूना चौरा देख के, बिटिया को याद आई अम्मा
तेरे जाने के बाद से तुलसी नहीं हरियाई अम्मा।।

  • पता - रत्ना निवास, पाठक वार्ड, कटनी [म. प्र.]

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