इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शुक्रवार, 14 जून 2013

खोटा सिक्‍का


श्याम सखा ' श्याम'
खोटा सिक्‍का क्‍या चल पाएगा साहिब
देखना ये रूप भी ढल जाएगा साहिब


        सीधा - सादा ख्वाब था अपने मिलन का तो
        क्‍या खबर थी सांप सा बल खाएगा साहिब

कौन जाने था करेंगे इन्तजार और यूं
इक सदी सा एक - इक पल जायेगा साहिब

        नेह से सहला दे गर इक बार बाप इसको
        बुझ रहा है जो दिया जल जायेगा साहिब

था जिसे हमने पकाया प्या की लौ पर
क्‍या वो शक के जुगनुओं से जल जायेगा साहिब

        यूं भटकने जो लगा है प्रीत नगरी में
        दर पे तेरे आ संभल जाएगा साहिब

'श्याम' जी यूं आप तो मत रूठिये हमसे
आपका यूं रूठना खल जाएगा साहिब
  • संपादक - मसि कागद,12, विकास नगर, रोहतक

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