इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शुक्रवार, 14 जून 2013

खोटा सिक्‍का


श्याम सखा ' श्याम'
खोटा सिक्‍का क्‍या चल पाएगा साहिब
देखना ये रूप भी ढल जाएगा साहिब


        सीधा - सादा ख्वाब था अपने मिलन का तो
        क्‍या खबर थी सांप सा बल खाएगा साहिब

कौन जाने था करेंगे इन्तजार और यूं
इक सदी सा एक - इक पल जायेगा साहिब

        नेह से सहला दे गर इक बार बाप इसको
        बुझ रहा है जो दिया जल जायेगा साहिब

था जिसे हमने पकाया प्या की लौ पर
क्‍या वो शक के जुगनुओं से जल जायेगा साहिब

        यूं भटकने जो लगा है प्रीत नगरी में
        दर पे तेरे आ संभल जाएगा साहिब

'श्याम' जी यूं आप तो मत रूठिये हमसे
आपका यूं रूठना खल जाएगा साहिब
  • संपादक - मसि कागद,12, विकास नगर, रोहतक

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