इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शनिवार, 22 जून 2013

जल है तो कल है

 

  • देवनारायण निषाद शिक्षक 
 रोज - रोज हम सैकड़ों बूंद, नलों से व्यर्थ बहाते हैं
पावन गंगा की देश में, प्यासे कई मर जाते हैं
जल की एक बूंद बचे तो, अमृत जैसा फल होगा
आज बचेगा जल तो, सुनहरा अपना कल होगा।

हर जगह हो रही धरती पर, पल - पल में खुदाई
बरकरार रहेगा ये कृत्य तो, देंगे पानी की दुहाई
प्यासे हर जीव - जन्तु, सूखा धरती भी करनी का फल होगा
आज बचेगा जल तो, सुनहरा अपना कल होगा।

रोक दो खुदाई धरती की, नहीं तो अभिशाप होगा
लड़ेंगे और मरेंगे लोग प्यासे - प्यासे से न मिलाप होगा
प्यासे से नाता जोड़ लो अब , हरियाली सबका हर पल होगा
आज बचेगा जल तो, सुनहरा अपना कल होगा।

मानवता का मानवता से पहचान हमें बनाना है
पानी की हर बूंद बचाकर सृष्टि नयी बसाना है
आओ प्रण कर लें हम, पानी सा निर्मल मन होगा
आज बचेगा जल तो, सुनहरा अपना कल होगा।   
  • ग्राम पोष्‍ट - गिरौद, वि.खं.- मगरलोड, तहसील - कुरूद, जिला - दुर्ग (छ.ग.)

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