इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

बुधवार, 12 जून 2013

गांधी फेर आजा ...


  • नन्दकुमार साहू
बाढ़त हे भारत म दिनों दिन, भारी अतियार
गांधी फेर आजा एक बार
        अहिंसा सत के बल म, अँगरेज ल तैंह भगाए ।
        आतंकवादी ऊहँचे, रोज कतको खून बहाए ।।
जनता के इहाँ हाल बेहाल हे, मस्त हवे सरकार
गांधी फेर आजा एक बार
        ओकरे सिंग बाढ़े हे, जेन हावे लबरा लफंगा ।
        पूरा देस दहलगे हे, जघा - जघा होवत हे दंगा ।।
नइ हे गरीब के आँसू पोछैया, रोवत हे बोमफार
गांधी फेर आजा एक बार
        दफतर करमचारी, आफिस के अधिकारी ।
        नेता अउ बय पारी, सब हे भ्रष्‍टाचारी ।।
देस ल ठाढ़े - ठाढ़ लिलत हे, भय , भूख, भ्रष्‍टाचार
गांधी फेर आजा एक बार
        बिन आँखी, कान, मुँहू के, तोर तीनों बेंदरा का बताही ।
        नियाले म घलो बिकथे, वकील, जज, अउ गवाही ।।
संसद म अब देस बिकत हे, लेही कोनो लेनदार
गांधी फेर आजा एक बार
        का सोंचे रेहे तैंह, अऊ फेर का होवत हे ।
        पाके सुराज उलटा, मुड़ धरके रोवत हे ।।
राम राज के सपना सँजोए, होगे वहू खुवार
गांधी फेर आजा एक बार
  • ग्राम - धामनसरा (मोखला)पोष्‍ट - सुरगी, जिला -राजनांदगांव (छ.ग.),
  •  मोबाइल - 9329 - 95482

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