इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 12 जून 2013

गढ़ के गढ़हईया


  • ध्रुव कुमार वैष्णव
छत्तीसगढ़िहा गढ़ के गढ़हईया, सऊहत बिसकरमा जान रे ।
लहू - पछिना के धार बोहइया, भागीरथी जेखर नाव रे ।।
पथरा ह देख के पथरा जथे, नदिया - नरवा ह ठड़िया जथे,
डोंगरी - डिलवा पहाड़ ह कपथे, पांव - पांव म समुंद ह नपथे ।
कहिथे पाया ह कारखाना के , इहि ह हमर सियान रे ।।

दांदर भर जांगर ह च लथे, कारी - पछिना गिरत ले लड़थे,
झड़ी - जाड़ अऊ घाम म बाहिर, गिरा के लहू कहानी लिखथे ।
दूंद ऊघरा अउ बिरबिट करिया, भिलई के लोहा जान रे ।।

रापा, गैती,तूतारी धरके, करमा, ददरिया के पाठ पढ़थे,
जांगर के संग नागर च लथे, भुइयां ह सोन के दाना उगलथे ।
धान कटोरा के चिन्हारी करईया, सऊहत अनदाता जान रे ।।

नरवा - नदिया के धार उतरथे, समुंद म आके कालेचुप,
जांगर के तर - तर धार चढ़थे, उत्ती, बुढ़ती, भंडार रखसऊ ।
गांव के जोगी ल जोगड़ा कहिथे, परदेश म जोग जगात रे ।।

दया - मया बर पाग ए गुड़ के, गोठ बर गुरतुर खेड़हा ए ,
नता - गोता म गोलइन्दा भाटा, सहिनाव, मितान अऊ ढ़ेड़हा ए ।
दही - मही अऊ पताल कस फदका, लरा - जरा म फदके जान रे ।।

पर बर जिइस, पर बर मरिस, गरूवा अस जिनगानी,
जिते - जिय त जिनगी रहिस दोनगा, फूंक दिस बड़हर बर जवानी ।
घर - कुरिया ह मडू हावे, महल ल छुआ दिस अगास रे ।।
  • ममता नगर, राजनांदगांव (छ.ग.)मोबाइल - 93296 - 92671

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