इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शुक्रवार, 14 जून 2013

हे शबरी के राम


  • आचार्य सरोज व्दिवेदी
मैं छत्तीसगढ़ ले बोलत हौं,पांव परत हौं भांचा राम,
तोर सेती हम भांचा मन ला,देवता कहिथन भांचा राम॥

मैं कौशल्या के भाई औं,अउ शबरी के बेटा आंव
जीहां जंगल - जंगल किंजरे,तोर पांव के लेटा तांव॥

राम तोर दण्डक बन होगे,अब जगमग छत्तीसगढ़ राज
शबरी कौशल्या के भाखा,छत्तीसगढ़ी पहिरलिस ताज॥

जिंहा - जिंहा तोर पांव परे हे,माटी सोना उगलत हे
ये ला कहिथे धान कटोरा,हीरा माणिक निकलत हे॥

दुनियां के हे लाखों देवता,छत्तीसगढ़ बर राम हे
तोर दया भर बने रहै,तब दूसर ले का काम हे॥

दया मया ल राखे रइबे,जोर हाथ मनावत हौं
शबरी के बोइर के तोला,सुरता राम देवावत हौं॥

सबके नावं में लगे हे राम,सबके मुंह म बसे हे राम
सुख में दुख में राम - राम,बस छत्तीसगढ़ में राम - राम॥

दण्डक बन छत्तीसगढ़,ये शबरी के धाम
तोर दया बरसे सदा, हे शबरी के राम॥
  • ज्‍योतिष कार्यालय,मेन रोड, तुलसीपुर, राजनांदगाव (छग)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें