इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शनिवार, 1 जून 2013

उहाँ - इहाँ



  • हरप्रसाद निडर
सबे सहर अब गंगा होगे,
मोर गंवाई नंगा होगे।
घूसखोर उहाँ डूबकी मारैं
इहाँ रोटी बर दंगा होगे॥
कमइया जांगर ल देखा,
भुंजाये कस पापड़।
दू बर ल दू आषाढ़ फेर,
मंहगाई के झापड़।
उहाँ मरूरहा बैपारी अऊ,
सुकटा मुंशी दबंगा होगे।
इहां बीमारी भूखमर्री म,
कोठी हर भर भंगा होगे॥
साहूकार के सूदखोरी म
लोटा बटकी बूड़गे।
गहना धनहा भैसा गाड़ा,
करम दया के फूटगे।
उहाँ के चार बेच के
मंजिल रंग बिरंगा होगे।
इहाँ धान दुबराज खेत के
मंडी म करंगा होगे॥
हाड़ी - हाड़ी म राजनीति
भरगे दूहना म पानी।
तैंतीस कोटि देवी देव संग
चढ़गे खपरा छानी।
उहाँ कनवा थानेदार,
भैरा अधिकारी चंगा होगे
इहाँ बने बर कोटवार,
जाति धरम म पंगा होगे॥
  • गटटानी, कन्या शाला के सामने, अकलतरा रोड, जांजगीर (छग.)

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