इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 1 जून 2013

उहाँ - इहाँ



  • हरप्रसाद निडर
सबे सहर अब गंगा होगे,
मोर गंवाई नंगा होगे।
घूसखोर उहाँ डूबकी मारैं
इहाँ रोटी बर दंगा होगे॥
कमइया जांगर ल देखा,
भुंजाये कस पापड़।
दू बर ल दू आषाढ़ फेर,
मंहगाई के झापड़।
उहाँ मरूरहा बैपारी अऊ,
सुकटा मुंशी दबंगा होगे।
इहां बीमारी भूखमर्री म,
कोठी हर भर भंगा होगे॥
साहूकार के सूदखोरी म
लोटा बटकी बूड़गे।
गहना धनहा भैसा गाड़ा,
करम दया के फूटगे।
उहाँ के चार बेच के
मंजिल रंग बिरंगा होगे।
इहाँ धान दुबराज खेत के
मंडी म करंगा होगे॥
हाड़ी - हाड़ी म राजनीति
भरगे दूहना म पानी।
तैंतीस कोटि देवी देव संग
चढ़गे खपरा छानी।
उहाँ कनवा थानेदार,
भैरा अधिकारी चंगा होगे
इहाँ बने बर कोटवार,
जाति धरम म पंगा होगे॥
  • गटटानी, कन्या शाला के सामने, अकलतरा रोड, जांजगीर (छग.)

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