इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

बुधवार, 26 जून 2013

उस सुबह के लिए

 
  • आनन्द तिवारी पौराणिक
 
नन्हें मृग छौने
देख रहे हैं अपलक
टकटकी लगाए अनमने
खुली धरती
विस्तृत आकाश
दूर तक स्वच्छन्द मन
कुँलाचे भर लेने की आस
ऊग आए खग - शावकों के पर
उड़ानों के लिए हो रहे तत्पर
थामकर जो ऊँगलियाँ चल रहे
उन आँखों में सपने कितने पल रहे
दूर तक चलना है उनको
स्वर्णिम भविष्य गढ़ना है उनको
अवरोध तो आएंगे निश्चित
दुराशाओं के घन छाएंगे निश्चित
कभी आँधी का भय होगा
कभी तूफान निर्दय होगा
चुभेंगे शूल पथ पर
बिछेंगे फूल भी पथ पर
नहीं रुकेंगे ये बढ़ते कदम
लक्ष्य तक चलना है हरदम
उठे हैं नन्हें हाथ
बुलन्द हौसलें के लिए
खूबसूरत चेहरों पर
खिलती मुस्कानों के लिए
लिखने नई इबारत के लिए
स्वर्णिम भारत के लिए
सुख , शान्ति, सुलह के लिए
घर - घर मिलेगी रोशनी
उस सुबह के लिए ...
  • पता - श्रीराम टाकीज मार्ग , महासमुन्द [ छत्तीसगढ़ ]

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