इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

रविवार, 2 जून 2013

चलव रे संगी ...


  • घनाराम बंजारे
चलव  रे संगी जम्मों मिल के करी रे कमाई
ये माटी के सेवा कर के जिनगी ल बिताई
ये भूंइयां म जनम ले हर तेकर कर्जा ल चुकाई
चलो रे संगी .............।

    किसान के मेहनत म संगी झुम उठे संसार
    पियर - पियर सरसों दिखे हरा भरा खेती खार
    मेहनत कर कर के संगी करी रे कमाई
    चलव रे संगी ..............।

अरतता के बोल लगा के नागर बईला म करी रे किसानी
इहि ल सब के भरोसा इही म सब के जिनगानी
ये भुईयां ल छोड़ के संगी हमन कहां जाई
चलव रे संगी ..................।

    निचट बढ़िया सुहाथे रे संगी हमर खेती खार
    अईसन कहां सुहाथे रे संगी कभू सहर
    गजब बढ़िया दिखे रे संगी इहां के लुगाई
    चलव रे संगी .................।

गजब मोहे हरियर के लुगरा पिवरा किनारी
निचट भाथे रे संगी धान हरियर सरसों पिंवरा बारी
दुल्हन जइसे सजे रहिथे रे भाई हमर धरती महतारी
चलव रे संगी ....................।
  • ग्राम - हरदी, पो - सिरली, थाना - सक्ती,जिला - जांजगीर  चाम्पा (छ.ग.)

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