इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

बुधवार, 12 जून 2013

जननी जय - जय भारती


  • गणेश यदु
जय हो मातृभूमि मेरी, जननी जय  - जय  भारती ।
संतानें तेरी तुझपे, सवर्स्व निवारती ।।
    जय चंदों, देशद्रोहियों, आतंकवादियों को भी माँ ।
    अपने बेटों की तरह ही तू है दुलारती ।।
    तेरे मन में खोट नहीं, सबके लिये समता है ।
    ममता की ऐसी मूरत, है तू माँ भारती ।।

परन्तु ऐसी औलादों को, तो सोचना चाहिए ।
जो अपनों को मार कर, बहादुरी बघारती ।।
आतंक और नक्‍सलवाद, अलगाववाद ताकतें ।
ताकती हैं तेरी कमजोरी को माँ भारती ।।
    परन्तु इन्हें नहीं पता, तेरी ओ गौरव गाथा ।
    तू क्रोधित हो जाए तो, चंडी का रूप धारती ।।
    सामने जो भी आ जाए, धराशायी होगा ही ।
    महिषासूर सम कोटि, असूरों को पछारती ।।

मुट्ठी भर आतंकवादी, किस खेत की मूली हैं ।
सबक सिखाने का समय , आ गया माँ भारती ।।
आशीष दो हमें माँ हम, कर सकें इनका सामना ।
तेरी कामनायें पूरी कर, सकें मॉं भारती ।।
  • संबलपुर, जिला - कांकेर  (छ.ग.)

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