इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 12 जून 2013

जननी जय - जय भारती


  • गणेश यदु
जय हो मातृभूमि मेरी, जननी जय  - जय  भारती ।
संतानें तेरी तुझपे, सवर्स्व निवारती ।।
    जय चंदों, देशद्रोहियों, आतंकवादियों को भी माँ ।
    अपने बेटों की तरह ही तू है दुलारती ।।
    तेरे मन में खोट नहीं, सबके लिये समता है ।
    ममता की ऐसी मूरत, है तू माँ भारती ।।

परन्तु ऐसी औलादों को, तो सोचना चाहिए ।
जो अपनों को मार कर, बहादुरी बघारती ।।
आतंक और नक्‍सलवाद, अलगाववाद ताकतें ।
ताकती हैं तेरी कमजोरी को माँ भारती ।।
    परन्तु इन्हें नहीं पता, तेरी ओ गौरव गाथा ।
    तू क्रोधित हो जाए तो, चंडी का रूप धारती ।।
    सामने जो भी आ जाए, धराशायी होगा ही ।
    महिषासूर सम कोटि, असूरों को पछारती ।।

मुट्ठी भर आतंकवादी, किस खेत की मूली हैं ।
सबक सिखाने का समय , आ गया माँ भारती ।।
आशीष दो हमें माँ हम, कर सकें इनका सामना ।
तेरी कामनायें पूरी कर, सकें मॉं भारती ।।
  • संबलपुर, जिला - कांकेर  (छ.ग.)

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