इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

बुधवार, 26 जून 2013

अब की बार वास्तविक हकदारों को मिला

छ.ग. शासन द्वारा महान विभूतियों के नाम पर दिये
जाने वाले राज्य सम्मान, अलंकरण और पुरस्कार




छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा राज्य की स्थापना की दसवीं वर्षगांठ के अवसर पर दिये गये 24 राज्य पुरस्कारों ने इस बार पुरस्कारों की प्रासंगिकता को प्रमाणित किया है। एक नवम्बर 2010 को राज्य के महान विभूतियों के नाम पर जिन लोगों को सम्मानित किया गया वे नि:संदेह इस सम्मान के वास्तविक हकदार है। संभवत: यह पहली बार हुआ है कि इस वर्ष दिये गये पुरस्कारों में किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं हुआ। अन्यथा राज्य गठन के बाद से दिये जाने वाले इन पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही विवाद भी जुड़ जाते थे। गत वर्ष इन पुरस्कारों की सूची में राज्य के एक आई . ए. एस. अफसर का नाम शामिल होने से बवाल हुआ था और राज्य सरकार की किरकिरी हुई थी,तब मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने हस्तक्षेप करते हुए उक्त अफसर का नाम हटाने के निर्देश दिये थे। यही कारण है कि इस बार राज्य सम्मान, अलंकरण और पुरस्कारों की घोषणा निर्णायक मंडलों की अनुशंसाओं के आधार पर तथा मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह द्वारा किये गये अनुमोदन के पश्चात की गई।
छत्तीसगढ़ राज्य सम्मान 2010 इस वर्ष जिन लोगों को प्रदान किये गये उनमें कला, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्रों में दिये गये नामों पर गौर करें तो ये सभी नाम निर्विवाद रुप से सर्वमान्य है। डॉ. सुनील कालड़ा, मृणाल चौबे, शायर अब्दुस्सलाम कौसर, डॉ. विनय कुमार पाठक, डॉ. उज्जवल पाटनी, मूर्तिकार जे.एम. नेल्सन, युवा पत्रकार राजेश गनोदवाले एवं डॉ. महेश चन्द्र शर्मा अपने अपने क्षेत्र के सुपरिचित नाम हैं जिन्हें किसी परिचय की आवश्यकता नहीं।
यह सुखद संयोग है कि इस बार राजनांदगांव जिले के दो व्यक्तियों और एक संस्था को राज्य पुरस्कार प्रदान किये गये। शायर अब्दुस्सलाम कौसर को उर्दू भाषा की सेवा के लिए हाजी हसन अली सम्मान, युवा अंतर्राष्ट्रीय हाजी खिलाड़ी मृणाल चौबे को खेल के लिए गुण्डाधूर सम्मान और श्री गणेश गौशाला ग्राम गनेरी डोंगरगांव को अहिंसा एवं गौ रक्षा के क्षेत्र में यति यमनलाल सम्मान से सम्मानित किया गया। हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में राजनांदगांव का नाम पहले से जाना पहचाना है। श्री कौसर के राज्य सम्मान से सम्मानित होने के बाद राजनांदगांव का नाम उर्दू साहित्य के नक्शे में भी शुमार हो गया।
मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के कुशल नेतृत्व में तेजी के साथ विकास की दिशा में बढ़ रहे छत्तीसगढ़ के नागरिकों की उपलब्धि को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। वह न केवल प्रशंसनीय है अपितु अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय भी है।
नवम्‍बर 2010
  •                                 संपादक

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