इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

मंगलवार, 25 जून 2013

दुआ का होना



  • ज्ञानेन्द्र साज
जैसे मुमकिन नहीं हाथों में हवा का होना
युं ही सम्भव नहीं शैतां में खुदा का होना

आदमी आदमी है फितरतों का आदि है
इससे उम्मीद नहीं अहले वफा का होना

दुआ न जिसके लिए काम कर सकी उसको
बेसबब होता दवाओं से शिका का होना

बहुत जरुरी है हर काम करने से पहले
सलामती के लिए माँ की दुआ का होना

प्यार लौटा है सदा हार का ऐ साज सुनो
इसमें मुमकिन नहीं है जीत - नफा का होना
  • पता - संपादक जर्जर कश्ती, 17 एच 212 जयगंज, अलीगढ़

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