इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

गुरुवार, 27 जून 2013

मुझे जिंदगी में क्या मिला




- श्रीमती गरिमा पटेल -

शराफत से मुझे जिंदगी में क्या मिला
जिंदगी हमारी है, करें किससे गिला।
गर्म हवा के झौंके से तन जलता है
जमीं पे जहन्नुम का बना सिलसिला।

पास तुम्हारे थे सभी रिश्ते - नातें यहां
तुम से एक पल भी मुझे नहीं मिला।
सभी जानते हैं शहर में नाम तुम्हारा
करें भी तो किससे शिकवा - गिला।

मैं भी राहे सफर में रुकूंगी नहीं अब
फतह करुंगी मुहब्बत का इक किला।
आटे - दाल का भाव हमें भी पता है
तभी तो मेरे चमन में एक फूल खिला।

  • पता - 9 - बी, नालंदा, अणुशक्ति नगर, मुंबई - 400094

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें