इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

गुरुवार, 27 जून 2013

मुझे जिंदगी में क्या मिला




- श्रीमती गरिमा पटेल -

शराफत से मुझे जिंदगी में क्या मिला
जिंदगी हमारी है, करें किससे गिला।
गर्म हवा के झौंके से तन जलता है
जमीं पे जहन्नुम का बना सिलसिला।

पास तुम्हारे थे सभी रिश्ते - नातें यहां
तुम से एक पल भी मुझे नहीं मिला।
सभी जानते हैं शहर में नाम तुम्हारा
करें भी तो किससे शिकवा - गिला।

मैं भी राहे सफर में रुकूंगी नहीं अब
फतह करुंगी मुहब्बत का इक किला।
आटे - दाल का भाव हमें भी पता है
तभी तो मेरे चमन में एक फूल खिला।

  • पता - 9 - बी, नालंदा, अणुशक्ति नगर, मुंबई - 400094

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