इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

गुरुवार, 27 जून 2013

मुझे जिंदगी में क्या मिला




- श्रीमती गरिमा पटेल -

शराफत से मुझे जिंदगी में क्या मिला
जिंदगी हमारी है, करें किससे गिला।
गर्म हवा के झौंके से तन जलता है
जमीं पे जहन्नुम का बना सिलसिला।

पास तुम्हारे थे सभी रिश्ते - नातें यहां
तुम से एक पल भी मुझे नहीं मिला।
सभी जानते हैं शहर में नाम तुम्हारा
करें भी तो किससे शिकवा - गिला।

मैं भी राहे सफर में रुकूंगी नहीं अब
फतह करुंगी मुहब्बत का इक किला।
आटे - दाल का भाव हमें भी पता है
तभी तो मेरे चमन में एक फूल खिला।

  • पता - 9 - बी, नालंदा, अणुशक्ति नगर, मुंबई - 400094

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