इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

गुरुवार, 20 जून 2013

दौना

  • मंगत रवीन्‍द्र 
॥ मन ले नहीं दौना, पाँव ले खोरी हे॥
॥ मया के बाँधे, बज्जर डोरी हे॥
अंधवा ल आँखी नहीं ता लाठी दिये जा सकथे। भैरा ल चिल्ला ता कोंदा ल इसारा म कहे जाथे। खोरवा लंगड़ा ल हिम्मत ले बल दिये जाथे। दौना बेचारी जनमती खोरी ए। आँखी कान तो सुरूजमुखी ए। भादों के ओरमे करिया घटा कस चून्दी, रिगबिग ले चाँदी कस उज्जर - उज्जर दाँत, सुकवा कस नकबेसरी, ढेंस काँदा कस कोंवर ठाठ म पिंयर साड़ी अरझे रहै पर बेचारी दौना एक गोड़ ले लचारी हे तिही पाय के दौना नाव छिप के खोरी नाव उजागर हे पर हाँ ।़ गुन म दौनेच्च ए ... अंगना दुवारी हर महमहावत रहै :-
॥ मन ले नहीं दौना, पाँव ले खोरी हे॥
॥ मया के बाँधे बज्जर डोरी हे॥
नानपन म खोरी के रंगू संग म बिहाव होइस। तइहा आज कस तिखी - तिखी ल तिखारत नइ रहै। घर - घराना अउ मन मिलै तहाँ जाँवर जोड़ी गढ़ देवैं। बस बढ़िया मजा ले जिंदगी चलै। रंगू तो पहली ... बड़ सीधवा रहिस पर आज ओकर रंग हर मइलावत हे। नानकन ओखी पाय तहाँ दौना ल रटारट पीटते पीटै ... बस ठड़गी अस ... बकठी अस ... बारा बारिस तो होगे तभो ले पोथी नइ उतारे। दुनियाँ बाल बच्चा बर तरसत रथे। लोग लइका ले घर दुवारी फुलवारी कस बन जाथे।
दौना बेचारी रंगू के घर फुलवारी ल महमहा नइ सकत ए जे पाय ते डारा ल खोंट देवै का एहर मनखे के हाथ ए ... ? नहीं। भगवान देथे ता परवा फोर के देथे। देवइया ल देथे ता पोसे नइ सकै अऊ नइ देय तेकर बर बरत दीया अंधियार होथे। ठकुरदइया कस सून्ना ... घर आंगन हो जाथे। रंगू हर लइका पाये के लोरस म बारा उदीम घला करिस। जगा - जगा देवता धामी ल धरना धरिस, बइगा गुनिया के पाँव परिस, सूपा घोंसवाइस पर कुँवार कस बादर बिन लहुट जाथे। ओकर बर ....
॥ देवता धामी पखरा लहुटगे, बइद भइगे लबरा॥
॥ सरहा नरियर के खतहा खोपरा, मतला होगे डबरा॥
अब तो चिखला माते कस दौना के जिंदगी होगे। गाँव के मंदपिहा झिटकू जेन छें पारा म बसे हे। मंद ल पियत- पियत सारी जिंदगी के सुख ल सुखाएं डबरा कस अंटवा डारे हे तेकरे भभकी म आ के रंगू हर ओकर बेटी चमेली ल दुसर कस डारिस। पी - इस एक अद्धी तहाँ ले देख ... ओकर बकबकी ल। छिन म समुंदर म पार बांध देथे। हिरदे म राम - राम संझा सिरिफ सौ ग्राम कहिस :- जब खोरी के कछु नइ दिखत ए ता काबर आने नइ बना डारस ...?  लोग लइका रथे ता बंस के नाव चलथे। अभी कतको उमर बचे हे। बुढ़ापा म कोन थेभा होही।  माटी पानी कोन दिही ? पितर पानी घला तो लगथे। मतवार के गोठ ल सुन के रंगू कथे - ता का करौं ? आधा उमर कोन छोकरी दिही ... संसार घला हाँसही। कहीं - देखतो रंगू ल, डाढ़ी मेंछा पाकगे तभो ले रंग चढ़ावत हे। झिटकू कथे :- हाँसन दे संसार ल, हाँसेच बर तो संसार बने हे। तहुं हाँस पर आने रकम ले ... मोर नोनी चमेली ल देखे हस ... ? तोर कस कोनो सजन मनखे मिलतीस ता अभीच्चे बिहाव ल कर देतेंव। लबरहा झिटकू के गोठ ल सुन के रंगू के मन पलटगे। गुनीस - पियक्कड़ ए ता का होइस मोर भबीस ल गुन के गोठियाइस हे। कहिस :- का होही। हाथे हँसिया खड़े बदाउर ... हाथ म दरपन ता चँदा म रूप देखे कोन जाये।  कतेक ल कहिबे। एदे चमेली संग रंगू के दुसर बिहाव हो जाथे।
बेचारी दौना दाँत चाब के रहिगे। करही ता करही का ... ? नइ भावै तेला भाजी म झोर ... नोनी बाबू अवतार नइ सकिस। एही ओकर लचारी ए तिही पाय के आज ओकर घर सउत चढ़ के आये हे, पर हाँ, दौना खोरी, कयरहीन नोहे। मोर घर म दीया बरै, अंजोर होय, बंस के नाव चलै एही गुन के मनीता ल मारिस अऊ चमेली ल सउत भाव ले न जान के छोटे बहिनी समझीस। घर - दुवार के भार ल सौंप दिस। तिरिया धरम के गोठ ल लखाइस। अब तो ताराकुंची ल चमेली के हाथ धरा दिस। तोरे घर, तोरे दुवार। खाले तीन जुवार।  चमेली हर दौना के कहर ल पाइस ता पून्नी के चंदा कस महमहाए लगिस। अइसे मजा ले जिंदगी चलत हे ...।
डेढ़ बच्छर होगे। भगवान के अपरम्पार लीला ए। साँझ के बेरा ... झुंझकुर म चिराई मन किलकोरत रहैं। पहटिया के बर्दी के घंटी -टापर बाजत हे। सुरूज नारायन अपन कोरा म जावत हे। छानी - छानी जेवन के कुहरा उड़त हे। खेत - खार म बगरे सब मनखे अपन - अपन घर डहर लहुटत हें। एती चमेली के देह उसले हे। पारा परोस के दु चार झन माइ लोगन मन एक कुरिया म सकलाय हे। नवा जीव के अगोरा म। नदिया ल नाँके डोंगा कस घरी भर म चमेली के कोंख ले एक सुन्दर लइका जनम लेइस। खुशी ल का बतावंव ... बाबू लइका सुनीस तहाँ रंगू के पाँव हर ताल पेड़ कस ऊँचा होगे। उत्ती मुँह करके खटिया म बइठे मुसकियावत हे। जेंवनी पार के चोंची मेंछा ल रसा - रसा के अंगरी म गुरमेटत् हे।
समुंदर के भंवना, ढुँसइसा सड़ँवा, मकोइसा काँटा अऊ मिरतुक ककरो नोहै। ए मन के हिरदे म दया मया के संचार नइ रहै तइसे लागथे। पथरा म कतको रस रितोव ... फोरे ले भीतरजुक्खा के जुक्खा ... अइसे काल घलो ए ...। चउँथावन दिन के ढरती बेरा लकलकाती घाम म माई चमेली के परान उखरगे। ओतो दुसरावन दिने ले असम्भार बुखार रहिस। बइगा हर हाथ छुृ के ओखद जोंगे रहिस। ओ तो चूल म रितोये एक दोना पानी बरोबर होगे। फूल बरोबर लइका ल धरती म मढ़ाके फिलफिली तितली कस उड़ागे।
॥ लोढ़ा माढ़े पार म सील बुड़गे खइया॥
॥ काँटा धरे न जाये हथोरी कोन एला बुझइया॥
बिपत के परबत फलक के एक चानी रंगू के मंघारा म गिरगे। खोरी के जगाये चौरा के झबुवा गोंदा ल हरही गाय हर खुरखून्द कर दिस। मही के मया भरे मरकी तिड़ीबिड़ी होगे। कथे :- मरदजात धीरज के खूंटा होथे पर रंगू कहाँ धीरज धरै। आँसू के धार छाती म टार बनगे।
॥ कथें मरद मन कुतुबमीनार॥
॥ जथे छन्दल जल सावन धार॥
पर अइसे नइ ए। का दुख ल कहौं ... आँसू के धार संग दुनियाँ ल गुनत राग पानी ल उठाइन।
दौना के फूल म रंग न पराग न पंखुरी, पर आज तो चमेली के झबुआ फू ल ल छोड़ के गंवागे। फूल हर मुरझाए झन दौना ल चेत करे ल परही। डउका जात तो सूक्खा सराई पान ए। फूल लगे नइ जानय। दौना खोरी के ममता जागगे अऊ  जी जान ले रतन बेटा ल सम्भारे लगीस। ठेलका फर म गुदा नइ रहै तभो ले दौना अपन जुक्खा ढेंटी ल चुहकावै। गाय अऊ छेरी के गोरस म रोपा के सेवा करत हे। पारा के गंगा नोनी जेकर दु ठन बाबू ... दुसर के टुटुआ के हे तभो ले साँझ कुन दौना के बेटा ल रपोट के पियावै। दौना के छंइहा महमहावत बड़ जुड़ रइथे। खच्चीत अपन कोरा म झबुआ गोंदा ल फूले दिही। सरग म फूले कदम कस महमहवाही... मंगत ल भरोसा हे ...।
॥ मन ले नहीं दौना, पाँव ले खोरी हे॥
॥ मया के बाँधे, बज्जर डोरी हे॥ 
  • शास.उच्‍च.माध्‍य.वि. कापन,जिला - जांजगीर चांपा(छग)

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