इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

सोमवार, 3 जून 2013

जिससे प्यार किया

  • जितेन्द्र कुमार साहू ' सुकुमार' 
जिससे प्यार किया, वो बेवफा हो रहे हैं।
पत्थर से दिल लगा के, हम पत्थर सा हो रहे हैं॥

हमने गुजारा जीवन, तेरी बेवफाई में।
हर एक पल कटती रही, तन्हाई में॥

नींद मेरी आँखों से उड़ी, वो चैन से सो रहे हैं।
पत्थर से दिल लगाके, हम पत्थर से हो रहे हैं॥

मारी उसने मेरी चाहत को ठोकर।
क्या मिला उसको मुझसे जुदा होकर॥

सावन की तरह खुद को अश्कों से भींगों रहे हैं।
पत्थर से दिल लगाके, हम पत्थर से हो रहे हैं॥

खोये - खोये रहते हैं अक्सर ख्यालों में।
अब चैन नहीं आये, इश्क के सवालों में॥

मेरी हो न पाई, पाने से पहले खो रहे हैं।
पत्थर से दिल लगाके, हम पत्थर से हो रहे हैं॥

काश, मेरा दिल पत्थर का बना होता।
धड़कता नहीं सीने में, न दर्दों से सना होता॥

जिससे प्यार किया, वो बेवफा हो रहे हैं।
पत्थर से दिल लगाके हम पत्थर से हो रहे हैं॥
  • चौबे बांधा राजिम जिला - रायपुर ( छग )

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