इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

बुधवार, 10 जुलाई 2013

गिरिराज खोजो वही गोकुल के वन में

 स्व. बासुदेव प्रसाद -




प्रस्तुति: अंजनी कुमार श्रीवास्तव

कमला विनोद हेतु गिरिजा निकेत गई।
पूछति कपाट लागि गिरिजा हो घर में।

भिक्षुक तिहारो कहां बलि मखशाला जहां।
विष के अहारी कहां वही पूतना की गोद मे

महा विष वाला काली नाग वाला कहां ?
काली नाग वाला वहीं कालीदह में

गिरिजा दुराओ ना बताओ गिरिराज कहां
गिरिराज खोजो वही गोकुल के वन में।

पता - सी / 204, लोअर हिनू, रांची - 834002

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