इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

जगन्नाथ ' विश्व ' की दो रचनाएं


स्वर्णिम सी प्रात

सुन्दर सन्दर्भों की स्वर्णिम सी प्रात
सूरज संग किरणों की लाया सौगात

बुला रहे गैल - गैल मुस्काते फुल
निवेदन से नरमाये संग - संग शूल
कर रही कली कली स्वागत की बात
सूरज संग किरणों की लाया सौगात

अगवानी कर रहा रंगीला ऋतुराज
सवार रही पुरवैया सौरभ की ताज
गीत गुन गुना रही भंवरी की जमात
सूरज संग किरणों की लाया सौगात

सम्बोधित मौन मुखर प्यार के  अपार
अभिनंदन आमंत्रण मन मांझी स्वीकार
निश्चय की नाव चले दिन चाहे रात
सूरज संग किरणों की लाया सौगात।

सिन्दूरी शाम
रथ सूरज ने छोड़ा अपिरिचित ग्राम।
अनसंवरी संवर गई सिन्दुरी शाम।

भगीरथ घर लौट रहे लेकर वरदान।
सपने सुकुमार हृदय मीठी मुस्कान।
पूर्ण हुए अनुबंधित अनकिये से काम।
अनसंवरी संवर गई सिन्दूरी शाम।

गुलाल गैल अंगड़ाई चंदन सी धूल।
आकाश में अंकुराये तारे ज्यों फूल
मचल उठा यौवन इच्छाओं के नाम।
अनसंवरी संवर गई सिन्दूरी शाम।

सात्वंना सुख की ले मुस्काई सांझ।
झुरमुट में खिला चंद्र गूंज उठी झांझ।
मन - पूजन ज्योत जली जागे प्रणाम।
अनसंवरी संवर गई सिन्दूरी शाम।
पता -
गरीमा प्रकाशन, मनोबल, 25 एम. आई. जी., हनुमान नगर, नागदा जं. (म.प्र.)  456335

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें