इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

जगन्नाथ ' विश्व ' की दो रचनाएं


स्वर्णिम सी प्रात

सुन्दर सन्दर्भों की स्वर्णिम सी प्रात
सूरज संग किरणों की लाया सौगात

बुला रहे गैल - गैल मुस्काते फुल
निवेदन से नरमाये संग - संग शूल
कर रही कली कली स्वागत की बात
सूरज संग किरणों की लाया सौगात

अगवानी कर रहा रंगीला ऋतुराज
सवार रही पुरवैया सौरभ की ताज
गीत गुन गुना रही भंवरी की जमात
सूरज संग किरणों की लाया सौगात

सम्बोधित मौन मुखर प्यार के  अपार
अभिनंदन आमंत्रण मन मांझी स्वीकार
निश्चय की नाव चले दिन चाहे रात
सूरज संग किरणों की लाया सौगात।

सिन्दूरी शाम
रथ सूरज ने छोड़ा अपिरिचित ग्राम।
अनसंवरी संवर गई सिन्दुरी शाम।

भगीरथ घर लौट रहे लेकर वरदान।
सपने सुकुमार हृदय मीठी मुस्कान।
पूर्ण हुए अनुबंधित अनकिये से काम।
अनसंवरी संवर गई सिन्दूरी शाम।

गुलाल गैल अंगड़ाई चंदन सी धूल।
आकाश में अंकुराये तारे ज्यों फूल
मचल उठा यौवन इच्छाओं के नाम।
अनसंवरी संवर गई सिन्दूरी शाम।

सात्वंना सुख की ले मुस्काई सांझ।
झुरमुट में खिला चंद्र गूंज उठी झांझ।
मन - पूजन ज्योत जली जागे प्रणाम।
अनसंवरी संवर गई सिन्दूरी शाम।
पता -
गरीमा प्रकाशन, मनोबल, 25 एम. आई. जी., हनुमान नगर, नागदा जं. (म.प्र.)  456335

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