इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

सोमवार, 15 जुलाई 2013

सस्ता



उमेश कुमार चौरसिया
आज बाजार में बड़ा हल्ला हो रहा था। सुना है मंहगाई में कुछ कमी हुई है। बड़े मैदान पर चल रही सभा में नेताजी जोर - जोर से बता रहे थे.ये हमने कर दिखाया है.....रसोई गैस में 20 और पेट्रोल - डीजल में 5.5 रूपये की कमी की है........हवाई जहाज का किराया भी हमने 30 प्रतिशत कम कर दिया है............जमीनों की कीमतें और सीमेंट - सरिये की कीमतें भी कम हो रही हैं........हमने जनता की सुविधा का पूरा ध्यान रखा है......इससे गरीब जनता को राहत मिलेगी.....। किसना दिन भर ठेले पर माल ढोता यह सब सुनकर बहुत खुश था। वह सोच रहा था - आज मेरी मजूरी में से चार - पांच रूपये तो बच ही जाएंगे।
शाम को वह जल्दी - जल्दी राशन की दुकान पहुंचा। वहां भी कुछ लोग मंहगाई में राहत होने की ही चर्चा कर रहे थे। किसना खुश होता हुआ बोला - सेठजी,मुझे तो आटा - दाल ही चाहिए.........इसमें कितने कम हुए......। उसकी बात सुन सेठजी सहित वहां खड़े सभी लोग ठहाका लगाकर हंस पड़े।
  • पता - 50ए महादेव कॉलोनी, नागफणी बोराज रोड, अजमेर 30500 ( राजस्थान)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें